
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। मिथिला स्टूडेंट यूनियन की ओर से मिथिला विकास बोर्ड की मांग को लेकर रविवार को विशाल जनसभा का आयोजन संकल्प रैली के रूप में राज मैदान में किया गया। कार्यक्रम का संचालन सागर नवदिया ने किया। वहीं, बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय संगठन मंत्री अविनाश भारद्वाज ने कहा कि यहां पचास हजार नौजवान आएं हैं। उनकी आंखों में समृद्ध मिथिला का सपना देखा जा सकता है। यह भीड़ सत्ता को चेतावनी दे रहा कि मिथिला का नौजवान अब अपनी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करेगा। कहा कि आखिर यह कौन सी व्यवस्था है जिसमें सात करोड़ मैथिलों की पूछ नहीं है।

यहां की शिक्षा व्यवस्था की हालात दयनीय है। स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। किसान दाने-दाने को तरस रहें हैं। नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है। पटना की सत्ता हो या फिर दिल्ली की उसमें हम मिथिलावासियों की भागीदारी सात करोड़ की है लेकिन हमारी पूछ क्यों नहीं है। इसी के विरोध में आज हजारों नौजवान यहां अपना अधिकार मांगने आए हैं। सशक्त समृद्ध मिथिला के परिकल्पना को

साकार करने हम आए हैं। आज यह भीड़ कह देना चाहती है सत्ताधीश मठाधीशों से कि अगर तुम हमारा अधिकार मिथिला विकास बोर्ड नहीं दोगे तो हम इतना सशक्त हो चुके हैं कि हम तुम्हारे समीकरण बदल देंगे। पटना के गलियारों में भूचाल ला देंगे। दिल्ली की सत्ता डोलने लगेगी, डगमगाने लगेगी। यह जो भीड़ है वह तुम्हारे तरह खरीदी हुई भीड़ नहीं है, यह ईमानदारों की भीड़ है।

पढ़े-लिखे नौजवानों, छात्र-छात्राओं की भीड़ है जो आज तुमसे अपना अधिकार मांगने आई है। भारद्वाज ने कहा कि भय के बिना प्रीत नहीं हो सकता उसी तरह आज हम शांतिपूर्ण ढंग से अपना अधिकार मांगने आए हैं। अगर हमलोगों की मांग प्रीत के रास्ते नहीं मिलती है तो हम

भय का रास्ता भी अख्तियार कर सकते हैं। वहीं यूनियन के राष्ट्रीय अध्य्क्ष रौशन मैथिल ने कहा कि यह हजारों की भीड़ मिथिला के गांव-गांव से खुद चल कर आई है। इसका एक ही मांग है कि मिथिला विकास बोर्ड के माध्यम से केंद्र सरकार एक लाख करोड़ मिथिला के विकास
के लिए इस क्षेत्र में ख़र्चा करें। यहां स्पेशल एडुकेशन जोन बनाया जाए। उच्च शिक्षा की व्यवस्था हो चुकी। यह विद्वानों की धरती है। यहां के विद्वानों ने पूरे विश्व को रास्ता दिखाया है। यह सरस्वती की धरती है, लेकिन यह मगही सरकार ने एक साजिश के तहत मिथिला के नामोंनिशान मिटाने का प्रयास किया है।

मिथिला में बंद पड़े चौदह चीनी मिल अगर चालू हो जाए तो दस लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। चुकी यह कृषि पर निर्भर क्षेत्र है और कृषि में एकमात्र नकदी फसल है, गन्ना की खेती अगर होती है तो यहां के किसान समृद्ध होंगे जो आदिकाल में थे। इन्होंने आईटी पार्क आईआईटी तारामंडल एयरपोर्ट व दरभंगा के तीनों तालाबों को एक एक कर पर्यटन स्थल बनाने की मांग की। मधुबनी में केंद्रीय विद्यालय एडवेंचर पार्क, झंझारपुर को जिला का दर्जा, बेगूसराय में एलएनएमयू का एक बैंच पूर्णियां, सुपौल, अररिया, खगड़िया जैसे अति पिछड़े

जिला को पांच-पांच हजार करोड़ कार्पस प्रदान करने, समस्तीपुर से दिल्ली भेज दिए गए पूसा एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर को फिर से समस्तीपुर में स्थापित करने की मांग किए। वहीं राष्ट्रीय महासचिव आदित्य मोहन ने कहा कि आज सात करोड़ की आबादी एक डीएमसीएच पर निर्भर है जिसकी हालात खुद वेंटिलेटर पर है और किसी से छुपी हुई नहीं है। सरकार जब पटना में एम्स बनाती है तो अलग जगह बनाती है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

हज़ारों की संख्या में रोजगार का सृजन हो लेकिन जब मिथिला में एम्स की बारी आती है तो डीएमसीएच को अपग्रेड की बात करने लगती है अरे आपने पीएमसीएच को अपग्रेड क्यों नहीं किया वहां अलग से एम्स बनाया सरकार ने वहां पैसा खर्च किया लेकिन सरकार नहीं चाहती है कि पैसा यहां खर्च हो। यहां के लोगों को रोजगार मिले। यही कारण है कि मगही सत्ता यह कुचक्र रच रही है। हम सत्ता को कह देना चाहते हैं कि हमारा जो अधिकार है वो तुमको देना होगा नहीं तो हम इस संघर्ष को और तेज करेंगे। ओजस्वी संचालन करते हुए वरिष्ठ छात्र नेता सागर नवदिया ने कहा कि मिथिला के विश्वविद्यालयों की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है प्रथमिक स्तर पर या फिर मध्य या उच्च स्तर पर शिक्षा को सरकार जान बूझकर ठीक नहीं कर रही है। यहां के डिग्रियों की कोई मूल्य नहीं है। ग्रेजुएट नौजवान को चार पांच सालों में डिग्रियां मिल रही है। शिक्षक नहीं है यहां आदिकाल में दर्जनों उद्योग-धंधा हुआ करता था लेकिन वर्तमान में इसे साजिशन लेवर जोन बना दिया गया। शिक्षा-स्वास्थ्य-किसान-छात्र-नौजवान के प्रति सरकार सजग नहीं है जिसका परिणाम आगामी दिनों में सरकार को यहां उपस्थित हज़ारों हज़ारों की जनसभा दिखाएगी। वहीं युवा कवि सह पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता राजनिश प्रियदर्शी ने कहा कि मैथिली भाषा पर सरकार को ध्यान नहीं है। प्राथमिक स्तर पर मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जा रहा है पांडुलिपियों के संरक्षण पर सरकार का ध्यान नहीं है। डीडी, मैथिली स्वतंत्र चैनल की बात हो या फिर मैथिली के संवर्धन पर सरकार विफल रही है। वहीं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप मैथिल ने कहा कि हम गैर-राजनीतिक संगठन हैं गत चार सालों से मिथिला के विकास के लिए संघर्षरत हैं जिसका परिणाम है कि आज हम हज़ारों लोग यहां इकठ्ठा हुए हैं और संकल्प रैली के माध्यम से मिथिला विकास बोर्ड की माँग कर रहे हैं।

वहीं अध्यक्षीय संबोधन करते हुए दरभंगा जिलाध्यक्ष अमित ठाकुर ने कहा मिथिला विकास बोर्ड के माध्यम से मिथिला अंतर्गत बीस जिला के सात करोड़ लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र सरकार इस क्षेत्र में एक लाख करोड़ मिथिला विकास बोर्ड के माध्यम से खर्च करें। वहीं, विश्वविद्यालय अध्यक्ष अमन सक्सेना व बिहार प्रभारी प्रियरंजन पांडेय ने कहा कि अगर मांग मिथिला विकास बोर्ड की मांग पूरा नहीं होता है तो संघर्ष को तेज किया जाएगा। आंदोलन की चिंगारी पटना व दिल्ली के लंका रूपी सरकार को जलाने का काम करेगी। आए दिन पटना व दिल्ली में उग्र-आंदोलन किया जाएगा। कार्यक्रम में मृत्युंजय ठाकुर,गणपति मिश्रा, नीतीश कर्ण, शिवेंद्र वत्स, विनय ठाकुर, कृष्णनंद मिश्र, धीरज झा, विकास पाठक, गोपाल चौधरी, सुमित सिंह, शशि अजय झा, कौशल क्रांतिकारी, दिवाकर झा, विक्की, संदोष मिश्रा सहित हजारों भीड़ उपस्थित थी।




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