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फ़रवरी, 14, 2026
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महाशिवरात्रि 2026: शिव पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं, संपूर्ण मार्गदर्शिका

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Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित महापर्व महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है, जो इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को पड़ रही है। इस पवित्र दिवस पर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। यदि आप पहली बार यह व्रत रखने का संकल्प कर रहे हैं, तो यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि इस पावन अवसर पर भगवान शिव को किन वस्तुओं का अर्पण करना शुभ होता है और किनसे बचना चाहिए, ताकि आपकी पूजा निर्विघ्न संपन्न हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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महाशिवरात्रि 2026: शिव पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं, संपूर्ण मार्गदर्शिका

महाशिवरात्रि 2026 पर करें इन वस्तुओं का अर्पण

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इनकी विधि-विधान से पूजा करने पर महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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  • जल: भगवान शिव को शुद्ध जल अर्पित करना सबसे प्रिय माना जाता है।
  • गंगाजल: गंगाजल से अभिषेक करने पर सभी पापों का नाश होता है।
  • दूध: कच्चा दूध शिवलिंग पर चढ़ाने से आरोग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • दही, घी, शहद, शक्कर: पंचामृत के रूप में इन सभी से अभिषेक करना शुभ होता है।
  • बेलपत्र: भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। इन्हें अर्पित करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ध्यान रहे बेलपत्र खंडित न हों और उनकी डंठल शिवलिंग से दूर रखी जाए।
  • धतूरा और आक के फूल: ये दोनों वस्तुएं शिव को अति प्रिय हैं और इन्हें अर्पित करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।
  • भांग: भांग को भी शिव पूजा में शामिल किया जाता है, यह शिव को भोग के रूप में चढ़ाई जाती है।
  • चंदन: चंदन लगाने से शीतलता मिलती है और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
  • पुष्प: सफेद रंग के पुष्प जैसे मोगरा, चमेली या कमल के फूल अर्पित करें।
  • फल: मौसमी फल जैसे बेर, सेब आदि का भोग लगाएं।
  • नैवेद्य: दूध से बनी मिठाइयां या भांग का भोग लगाएं।
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महाशिवरात्रि पूजा में वर्जित सामग्री

कुछ वस्तुएं ऐसी भी हैं जिन्हें भगवान शिव की पूजा में अर्पित करना वर्जित माना जाता है। इनका ध्यान रखना आवश्यक है।

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  • तुलसी दल: भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  • केतकी और चंपा के फूल: इन फूलों को शिव पूजा में वर्जित माना गया है।
  • लोहे के बर्तन: शिवलिंग पर किसी भी धातु के बर्तन से जल नहीं चढ़ाना चाहिए, सिवाय तांबे के।
  • हल्दी और सिंदूर: ये सौभाग्य की वृद्धि के लिए देवी देवताओं को अर्पित किए जाते हैं, शिव को नहीं।
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महाशिवरात्रि की सरल पूजा विधि

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवलिंग की पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर संकल्प लेकर पूजा प्रारंभ करें।

  1. अभिषेक: सर्वप्रथम शिवलिंग को शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से अभिषेक करें।
  2. चंदन लेपन: अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।
  3. पुष्प अर्पण: आक, धतूरा, बेलपत्र और अन्य शुभ पुष्प अर्पित करें।
  4. भोग: भांग, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  5. दीपक प्रज्वलन: शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूपबत्ती लगाएं।
  6. मंत्र जाप: पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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शिव मंत्र

महाशिवरात्रि के दिन शिव मंत्रों का जाप करने से विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है।

ॐ नमः शिवाय

महाशिवरात्रि का महत्व और उपाय

महाशिवरात्रि का व्रत करने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य वर मिलता है, विवाहितों के दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। इस दिन रात्रि जागरण कर शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। महाशिवरात्रि पर निर्जला व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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