

Darbhanga Water Crisis को लेकर जिले के सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से मुलाकात की है। पानी जब सिर से ऊपर चढ़ जाए तो आफत, लेकिन जब धरती के सीने में गुम हो जाए तो महा-आफत। मिथिला की धरती आजकल इसी महा-आफत से जूझ रही है, और इस संकट की गूंज अब देश की राजधानी तक पहुंच गई है। शनिवार को सांसद डॉ. ठाकुर ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से उनके मंत्रालय कक्ष में मिलकर दरभंगा की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान सांसद ने मिथिला की परंपरा के अनुसार केंद्रीय मंत्री को पाग, अंगवस्त्र और मखान माला से सम्मानित भी किया। उन्होंने मंत्री को एक पत्र सौंपते हुए बताया कि पिछले साल गिरते भूजल स्तर के कारण जिले के अधिकांश गांवों में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी। हालांकि नल-जल योजना से आपूर्ति की गई, फिर भी लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
Darbhanga Water Crisis के स्थाई निदान पर हुई चर्चा
सांसद ठाकुर ने मंत्री के साथ चर्चा में इस बात पर जोर दिया कि घरेलू उपयोग, मवेशियों और कृषि के लिए पानी के संकट से निपटने के लिए एक स्थाई समाधान आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि सार्वजनिक स्थानों पर समरसेबल, चापाकल लगाने के साथ-साथ जल पुनर्भरन यानी वॉटर रिचार्जिंग योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मंत्रालय और जिला प्रशासन को निर्देशित किया जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने पत्र में क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत और नल-जल योजना की आपूर्ति को सुदृढ़ करने का भी आग्रह किया ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
पश्चिमी कोसी तटबंध का भी होगा कायाकल्प
पेयजल संकट के अलावा, सांसद ने पश्चिमी कोसी तटबंध के उच्चीकरण और सुदृढ़ीकरण का महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि लगभग 66 साल पुराने इस तटबंध का नवीनीकरण अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इसके लिए लगभग तीन सौ करोड़ रुपये की लागत से भेजा से गंडौल के बीच तटबंध के नवीनीकरण और इस पर टू-लेन सड़क निर्माण के लिए डीपीआर को मंजूरी दी थी, जिसका निर्माण कार्य पूरा होना बाकी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
सांसद ने मंत्री को तटबंध की उपयोगिता समझाते हुए कहा कि इसके नवीनीकरण से न केवल भविष्य में बाढ़ की तबाही और जान-माल के नुकसान को रोका जा सकेगा, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारा भी बनेगा। इस तटबंध पर सड़क बन जाने से चार जिलों – मधुबनी, सुपौल, दरभंगा और सहरसा के बीच बेहतरीन कनेक्टिविटी स्थापित हो जाएगी, जिससे व्यापार और आवागमन में सुविधा होगी।
चार जिलों के लिए साबित होगी वरदान
डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर शीघ्र पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसका जल्द ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सांसद ने कहा कि केंद्र और बिहार की एनडीए सरकार आमजनों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इन योजनाओं का क्रियान्वयन इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण होगा। गिरता भूजल स्तर और बाढ़ दोनों ही इस क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।




