

Illegal Tree Cutting: जो पेड़ दशकों तक चुपचाप खड़ा रहकर सरकारी दफ्तर की हर हलचल का गवाह रहा, आज उसी की गुमशुदगी पर हंगामा बरपा है। मामला केवटी प्रखंड मुख्यालय का है, जहां करीब 50 साल पुराने श्रीषट के पेड़ को कथित तौर पर अवैध रूप से काट दिया गया, और अब यह जांच के घेरे में है।क्या है Keoti में Illegal Tree Cutting का पूरा मामला?
दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड मुख्यालय परिसर में लगे लगभग पचास वर्ष पुराने एक श्रीषट के पेड़ की अवैध कटाई ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। इस मामले को लेकर केवटी पंचायत की पंचायत समिति सदस्या के प्रतिनिधि इकबाल अंसारी ने सीधे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को एक आवेदन भेजकर उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में वन संरक्षण अधिनियम 1927 एवं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का हवाला देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है।
आवेदन के अनुसार, इस राजकीय वृक्ष को काटने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की गई। आरोप है कि लगभग 20 दिन पहले पेड़ की एक करीब 5 फीट मोटी डाल को काटकर परिसर से बाहर भेज दिया गया था। इसके बाद, 3 फरवरी से 9 फरवरी के बीच पेड़ के बाकी हिस्सों को भी टुकड़ों में काटकर ठिकाने लगा दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि इस पूरी घटना के साक्ष्य के तौर पर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज, जियो-टैग्ड तस्वीरें और लकड़ी के उपयोग को लेकर संबंधित पदाधिकारियों के कथित बयानों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।अधिकारियों की दलील और वन विभाग की जांच
जब इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) चंद्र मोहन पासवान से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि पेड़ काफी पुराना था और गिर गया था। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि लकड़ी सुरक्षित है और उसका नियमानुसार ऑक्शन (नीलामी) किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, पीसीसीएफ को दिए गए आवेदन के बाद वन विभाग भी हरकत में आ गया है।वनो के क्षेत्र पदाधिकारी एच. के. झा ने प्रारंभिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि पेड़ कटाई में अनियमितता बरती गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेड़ काटने का तरीका गलत था और इस प्रक्रिया से पहले वन विभाग को सूचित करना तथा स्वीकृति लेना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया। इस मामले की जांच के लिए वनपाल काजल कुमारी को स्थल पर भेजा गया है, हालांकि उनकी रिपोर्ट अभी वरीय अधिकारियों को नहीं सौंपी गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रिपोर्ट मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने सरकारी परिसरों में मौजूद पेड़ों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय स्तर पर भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब देखना यह है कि जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।




