

Salary Hike: नवंबर 2025 में भारत में लागू हुए नए श्रम कोड्स को लेकर कर्मचारियों और कंपनियों के बीच वेतन वृद्धि पर पड़ने वाले असर को लेकर अटकलें तेज थीं। कई लोगों को लगा कि इससे सैलरी हाइक की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिभा को बनाए रखने की अनिवार्यता के चलते ज्यादातर कंपनियां अपनी नियोजित वेतन वृद्धि जारी रखेंगी, जिससे कर्मचारियों के चेहरों पर खुशी बरकरार रहेगी।
भारत में Salary Hike पर नए श्रम कोड्स का असर: क्या कंपनियां वेतन वृद्धि जारी रखेंगी?
Salary Hike और नए श्रम कोड्स: क्या बदल रहा है?
नवंबर 2025 से लागू हुए नए श्रम कोड्स ने देश के कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी थी। इन कोड्स के तहत ग्रेच्युटी, बोनस, ओवरटाइम और छुट्टियों के नकदीकरण (leave encashment) की गणना के तरीके बदल गए हैं। इस बदलाव का सीधा असर कंपनियों की कर्मचारी लागत पर पड़ा है, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में, जहाँ उच्च वेतन वाले पेशेवर कार्यरत हैं। हालांकि, लागत बढ़ने के बावजूद, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि वेतन वृद्धि की गति बहुत धीमी नहीं होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसकी मुख्य वजह यह है कि कंपनियों को शीर्ष प्रतिभाओं को अपने साथ बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
वर्ष 2026 के लिए औसत Salary Hike लगभग 9% रहने का अनुमान है, जो पिछली अपेक्षाओं से बेहतर है। कंपनियों के लिए यह एक संतुलन साधने वाली स्थिति है, जहाँ उन्हें लागत नियंत्रण और प्रतिभा अधिग्रहण दोनों को प्राथमिकता देनी है। नए श्रम कोड्स ने बेशक कुछ शुरुआती चुनौतियाँ खड़ी की हैं, लेकिन भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार दिख रहा है।
लंबी अवधि में, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग बढ़ने की संभावना है, जिससे कुछ हद तक मैन्युअल श्रम की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वेतन वृद्धि पूरी तरह रुक जाएगी। कुशल श्रमिकों और विशेष प्रतिभाओं की मांग हमेशा बनी रहेगी, जिससे उनके वेतन में लगातार वृद्धि होती रहेगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
भविष्य की संभावनाएं और उद्योग पर प्रभाव
कंपनियां अब लागत अनुकूलन के नए तरीकों पर विचार कर रही हैं, जिसमें कर्मचारियों को दिए जाने वाले अन्य भत्तों और लाभों का पुनर्गठन शामिल हो सकता है। नए श्रम कोड्स के प्रावधानों के तहत कंपनियों को अधिक पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, जो दीर्घकालिक रूप से कर्मचारियों के लिए फायदेमंद साबित होगा। कुल मिलाकर, भारतीय रोजगार बाजार लचीला बना हुआ है और वेतन वृद्धि की प्रवृत्ति एक मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है, जहाँ कर्मचारियों को उनके मूल्य का भुगतान मिल रहा है। यह निश्चित रूप से भारतीय कार्यबल के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

