

Araria News: प्रशासनिक धौंस और डॉक्टरी पेशे के स्वाभिमान के बीच जब टकराव हुआ, तो उसकी गूंज अररिया की सड़कों पर सन्नाटे के रूप में सुनाई दी। जिले में एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा डॉक्टर को कथित तौर पर थप्पड़ मारे जाने के बाद चिकित्सा जगत में उबाल आ गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जिले के सभी निजी अस्पताल, क्लिनिक, जांच घर और यहां तक कि दवा दुकानें भी पूरी तरह बंद रहीं। इस बंदी के कारण इलाज के लिए दूर-दराज के इलाकों से आए मरीजों और उनके परिजनों को बिना इलाज के ही निराश होकर लौटना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।
Araria News: जानें क्यों भड़का है पूरा विवाद
यह पूरा मामला गुरुवार को फारबिसगंज के रेफरल रोड स्थित बचपन हॉस्पिटल से शुरू हुआ। जिलाधिकारी द्वारा अवैध नर्सिंग होम और जांच केंद्रों की पड़ताल के लिए दो धावा दलों का गठन किया गया था। इनमें से एक दल जांच के लिए बचपन हॉस्पिटल पहुंचा था। जांच के दौरान ही धावा दल में शामिल एडीएम सह उप निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. रामबाबू और अस्पताल के चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। आरोप है कि इसी दौरान एडीएम ने अपना आपा खो दिया और डॉक्टर दीपक कुमार को थप्पड़ जड़ दिया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई और दोनों पक्षों में हाथापाई शुरू हो गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलते ही एसडीओ अभय कुमार तिवारी और एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसी तरह मामले को शांत कराया। उन्होंने धावा दल के सदस्यों को अस्पताल से सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद से ही शहर के डॉक्टरों में भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके परिणामस्वरूप यह डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हुई है।
थाने में शिकायत, FIR का इंतज़ार
घटना के बाद, धावा दल की ओर से चिकित्सक के खिलाफ फारबिसगंज थाने में एक आवेदन दिया गया। वहीं, जब आईएमए के सदस्य डॉक्टर की तरफ से जवाबी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो आरोप है कि उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद चिकित्सक की ओर से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई। हालांकि, शनिवार तक दोनों ही मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं होने की सूचना है, जिससे डॉक्टरों का गुस्सा और भी बढ़ गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आईएमए ने जिला प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को अनिश्चितकाल के लिए ठप करने का फैसला किया है। फारबिसगंज केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने भी आईएमए का समर्थन करते हुए सभी दवा दुकानों को बंद रखा है, जिससे मरीजों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। फिलहाल, प्रशासन और डॉक्टरों के बीच यह गतिरोध बना हुआ है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।


