

Civil Defence: बोकारो में 54 ‘संकटमोचक’ तैयार, उपायुक्त बोले- सोशल मीडिया पर रील बनाकर लोगों को करें जागरूक
Civil Defence: जब सड़कों पर जिंदगी और मौत के बीच का फासला चंद लम्हों का हो, या कोई अप्रत्याशित आपदा दस्तक दे दे, तो देवदूत बनकर कौन सामने आएगा? बोकारो में अब ऐसे ही 54 देवदूतों की एक फौज तैयार हो गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में समाज के लिए रक्षा कवच का काम करेंगे। चास स्थित आकास अस्पताल के सभागार में नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) का छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हो गया, जिसमें इन स्वयंसेवकों को हर चुनौती से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
समापन समारोह में जिले के उपायुक्त अजय नाथ झा और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार ने शिरकत की। इस दौरान नव-प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव कार्यों का जीवंत प्रदर्शन कर अपनी काबिलियत का परिचय दिया, जिसे देखकर सभी अधिकारीगण प्रभावित हुए।
Civil Defence के स्वयंसेवक समाज के लिए प्रेरणा स्रोत: उपायुक्त
उपायुक्त अजय नाथ झा ने नव-प्रशिक्षित वोलेंटियर्स को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने सभी से मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाने का आग्रह किया। उपायुक्त ने कहा, “आपने जो सीखा है, उसे अपने तक सीमित न रखें। अपने आस-पास के लोगों को भी प्राथमिक उपचार, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया के प्रति जागरूक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।”
उन्होंने एक अभिनव सुझाव देते हुए कहा कि स्नेक बाइट, सड़क दुर्घटना, सीपीआर, फ्रैक्चर या आग लगने जैसी घटनाओं के बाद क्या करना चाहिए, इसकी छोटी-छोटी जानकारी वाली वीडियो या रील बनाकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करें। इससे सही जानकारी तेजी से आम लोगों तक पहुंचेगी और कई जानें बचाई जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि आपदा या दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्वयंसेवक बिना देरी किए घटनास्थल पर पहुंचें और पूरी सूझबूझ से अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।
सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर
इस अवसर पर डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने प्रशिक्षण की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि छह दिवसीय सत्र के दौरान प्रतिभागियों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से जानकारी दी गई, जिनमें शामिल हैं:
- स्नेक बाइट प्रबंधन
- सीपीआर देने की सही तकनीक
- सड़क दुर्घटना में बचाव कार्य
- आपातकालीन स्ट्रेचर का उपयोग
- फ्रैक्चर और हड्डी टूटने पर प्राथमिक उपचार
- जलने पर तत्काल राहत के उपाय
डीडीसी ने बताया कि मॉक ड्रिल और लाइव डेमो के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों जैसा अनुभव कराया गया, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में बिना घबराए और पूरे आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें। इस तरह का प्रशिक्षण जिले की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
लाइव डेमो से दिखाया दम, मिला प्रमाण पत्र
समापन समारोह के दौरान, सभी 54 नव-प्रशिक्षित वोलेंटियर्स ने समूहों में बंटकर विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों का नाट्य रूपांतरण किया। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है या किसी को हार्ट अटैक आने पर सीपीआर देना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके प्रदर्शन की सभी ने सराहना की और कहा कि जिले में सिविल डिफेंस की यह सशक्त टीम किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन का सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर स्टेट ट्रेनिंग ऑफिसर डॉ. एस. पी. वर्मा, डिप्टी डिविजनल वार्डन डॉ. निशांत कुमार, प्राथमिक उपचार व्याख्याता डॉ. पूजा समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/


