

Mahashivratri: आज की पावन रात्रि भगवान शिव की असीम कृपा और भक्ति का अनुपम अवसर लेकर आई है। यह रात्रि केवल एक पर्व नहीं, अपितु आत्मा के शुद्धिकरण, शक्ति के जागरण और सिद्धियों की प्राप्ति का महाकाल है।
महाशिवरात्रि 2026: दुर्लभ संयोगों में शिव आराधना का महापर्व
Mahashivratri पर विशेष ज्योतिषीय योग और उनका महत्व
महाशिवरात्रि: आज की पावन रात्रि भगवान शिव की असीम कृपा और भक्ति का अनुपम अवसर लेकर आई है। यह रात्रि केवल एक पर्व नहीं, अपितु आत्मा के शुद्धिकरण, शक्ति के जागरण और सिद्धियों की प्राप्ति का महाकाल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस वर्ष महाशिवरात्रि 2026 के अवसर पर कई दुर्लभ ज्योतिषीय योग बन रहे हैं, जो इस पर्व की महत्ता को और बढ़ा देते हैं। इन शुभ मुहूर्तों में की गई शिव आराधना अनंत पुण्य फलदायी होती है। शास्त्रों के अनुसार, शिव और शक्ति का यह मिलन सृष्टि के कल्याण का प्रतीक है। इस दिन भक्तजन भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह रात्रि आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक सुख-समृद्धि दोनों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
महाशिवरात्रि 2026: शिव पूजा विधि
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां दी गई विधि के अनुसार शिव पूजा कर सकते हैं:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर शिवरात्रि व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और गन्ने का रस अर्पित करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल, गुलाब के फूल आदि चढ़ाएं।
- चंदन, रोली और अक्षत से शिवलिंग का तिलक करें।
- भगवान शिव को भोग लगाएं, जिसमें फल, मिठाई और विशेष रूप से ठंडाई शामिल हो।
- धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर शिव चालीसा का पाठ करें और शिव मंत्रों का जाप करें।
- रात्रि जागरण कर चारों प्रहर की पूजा करें।
महाशिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का विशेष महत्व होता है। शिव पूजा के चार प्रहरों का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है (ये समय सामान्य गणना के अनुसार हैं और स्थानीय पंचांग के अनुसार इनमें थोड़ा अंतर हो सकता है):
| प्रहर | अवधि |
|---|---|
| प्रथम प्रहर | शाम 06:20 PM – रात 09:25 PM |
| द्वितीय प्रहर | रात 09:25 PM – रात 12:30 AM |
| तृतीय प्रहर | रात 12:30 AM – प्रातः 03:35 AM |
| चतुर्थ प्रहर | प्रातः 03:35 AM – प्रातः 06:40 AM |
| निशिता काल पूजा | रात 12:07 AM – रात 12:57 AM |
| पारण का समय | प्रातः 06:40 AM (अगले दिन) |
महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसी दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जिससे सृष्टि का सृजन, पालन और संहार तीनों हुए। यह भी माना जाता है कि इसी रात्रि को भगवान शिव ने विषपान कर संसार को बचाया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन सच्चे मन से शिव जी की आराधना करने से सभी पापों का नाश होता है और साधक को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
ॐ नमः शिवाय
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
निष्कर्ष एवं उपाय
महाशिवरात्रि 2026 पर भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर जीवन को धन्य करें। इस पावन अवसर पर शिव चालीसा का पाठ करना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना और रुद्राभिषेक करवाना अत्यंत शुभ होता है। किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र चढ़ाएं। इससे महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। यह रात्रि आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए, ऐसी हमारी कामना है।
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