

Hardeep Singh Puri: राजनीति के फलक पर कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जिनकी चमक न सिर्फ उनके दल को रोशन करती है, बल्कि प्रशासन के हर मोर्चे पर भी उनकी छाप गहरी होती है। ऐसे ही एक अनुभवी प्रशासक हैं, जो आज 74वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।
Hardeep Singh Puri: अनुभवी प्रशासक से केंद्रीय मंत्री तक का शानदार सफर, जानिए अनसुनी बातें
हरदीप सिंह पुरी: जन्म, शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी आज 15 फरवरी को अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शुमार हरदीप सिंह पुरी की छवि एक कुशल वक्ता और दक्ष प्रशासक की रही है। शहरी विकास, आवास और पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उनका अनुभव और नीतिगत समझ उन्हें खास बनाती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में भी उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। उनके जन्मदिन के अवसर पर आइए जानते हैं हरदीप सिंह पुरी के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प और प्रेरक बातें।
हरदीप सिंह पुरी का जन्म दिल्ली में 15 फरवरी 1952 को हुआ था। उनके पिता भगत सिंह पुरी एक सिविल सेवक थे और माता का नाम कुंदन पुरी था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा लाजपत नगर में हुई, जिसके बाद उन्होंने बोर्डिंग स्कूल में भी पढ़ाई की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से इतिहास में कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर इतिहास में कला स्नातकोत्तर भी किया। इसके उपरांत उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में इतिहास के व्याख्याता के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
साल 1974 में हरदीप सिंह पुरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हुए। विदेश मंत्रालय में उन्होंने भारत सरकार के संयुक्त सचिव के रूप में दो बार – 1994 से 1997 और फिर 1999 से 2002 तक – कार्य किया। इसके अतिरिक्त, 1997 से 1999 तक उन्होंने रक्षा मंत्रालय में भी संयुक्त सचिव का पद संभाला। बाद में उन्हें ब्राजील में भारत के राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया। 2009 से 2013 तक, उन्होंने विदेश मंत्रालय में भारत सरकार के सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। ब्राजील में अपने महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यकाल के दौरान, उन्हें ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ रियो ब्रैंको’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया, जो उनकी असाधारण कूटनीतिक क्षमताओं का प्रमाण है।
जापान, यूनाइटेड किंगडम और श्रीलंका जैसे देशों में भी उन्होंने उप-उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2011 से 2013 तक वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवादी निरोधी समिति के अध्यक्ष रहे। अगस्त 2011 और नवंबर 2012 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष का पद भी संभाला, जहाँ उन्होंने वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
राजनीतिक सफर की अनूठी यात्रा
साल 2014 में हरदीप सिंह पुरी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए, जो उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। 2018 से वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। 2017 में उन्हें आवास और शहरी मामलों के मंत्री के रूप में केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया। मई 2019 में, पुरी ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार के बावजूद, उनके अनुभव और क्षमताओं को देखते हुए, 2019 में उन्हें उड्डयन राज्य मंत्री और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दिए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जुलाई 2021 में, उन्हें केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के पद पर पदोन्नत किया गया, जहाँ वे एक प्रमुख केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की ऊर्जा सुरक्षा और नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
हरदीप सिंह पुरी का जीवन सार्वजनिक सेवा और कूटनीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी दूरदर्शिता और प्रशासनिक कौशल ने उन्हें न केवल एक सफल राजनेता बनाया है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में भी स्थापित किया है जो देश के विकास में लगातार योगदान दे रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके जन्मदिन पर, देश उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा।




