

H-1B Visa: अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीयों के लिए एच-1बी वीज़ा हमेशा से एक एक अहम रास्ता रहा है। हालांकि, हाल ही में एक अध्ययन ने इस वीज़ा से जुड़े वेतन अंतर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जो विदेशी कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
एच-1बी वीज़ा धारकों को अमेरिकी कंपनियों में मिल रहा है कम वेतन, बड़ा खुलासा
अमेरिका में एच-1बी वीज़ा और वेतन का मुद्दा
आजकल अमेरिका में कई कंपनियां एच-1बी वीज़ा धारकों को नियुक्त करती हैं। यह वीज़ा उन विदेशी कर्मचारियों को दिया जाता है जो विशेष रूप से तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में काम करने के लिए अमेरिका आते हैं। ये वीज़ा रोजगार देने वाली कंपनियों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गए हैं, क्योंकि इनसे उन्हें मजदूरी लागत में बचत करने का अवसर मिलता है। हालांकि, एक नए आर्थिक अध्ययन के अनुसार, अमेरिकी कंपनियां अपने एच-1बी कर्मचारियों को अपने अमेरिकी कर्मचारियों से कम वेतन देती हैं, जो एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च (NBER) द्वारा किए गए इस अध्ययन में लाखों नियुक्तियों के वेतन आंकड़े जांचे गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस शोध के अनुसार, एच-1बी वीज़ा धारकों को समान अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है, जब शिक्षा, व्यवसाय, आयु, लिंग और स्थान जैसे कारकों को समायोजित किया जाता है।
वेतन अंतर और कंपनियों की बचत
इस शोध पत्र में यह पाया गया कि यदि बिना किसी समायोजन के वेतन आंकड़े देखे जाएं, तो एच-1बी कर्मचारी अमेरिकी कर्मचारियों से करीब 13 प्रतिशत ज्यादा वेतन कमाते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा उन कर्मचारियों के बारे में है जो अमेरिका के उच्च वेतन वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में काम करते हैं। लेकिन, जब नौकरी की भूमिका और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है, तो यह वेतन अंतर उलट जाता है, और एच-1बी कर्मचारियों का वेतन 16 प्रतिशत कम हो जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि यह वेतन अंतर 29 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जो एच-1बी वीज़ा धारकों के लिए एक बड़ी वित्तीय हानि हो सकती है। जॉर्ज जे. बोरजास, जो इस अध्ययन का हिस्सा थे, ने न्यूजवीक से बात करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि कितनी कंपनियां एच-1बी वीज़ा का उपयोग करती हैं और कितनी कंपनियां सिर्फ एक या दो एच-1बी कर्मचारियों को ही नियुक्त करती हैं। उनके अनुसार, इन कंपनियों में भी वेतन का अंतर बहुत बड़ा होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि इन कंपनियों को अपने एच-1बी कर्मचारियों के लिए हर साल वेतन पर काफी बचत होती है। अनुमान के अनुसार, जिन कंपनियों ने एच-1बी कर्मचारियों को नियुक्त किया, उन्होंने छह साल की अवधि में एक कर्मचारी पर औसतन 100,000 डॉलर तक की बचत की। यह बचत कंपनियों के लिए बहुत आकर्षक हो सकती है, खासकर यदि वे बड़ी संख्या में एच-1बी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं।
वीज़ा की उच्च मांग और नियोक्ता का लाभ
एच-1बी वीज़ा के लिए अमेरिका में हर साल बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं, लेकिन इन वीज़ा की संख्या सीमित होती है। 2021 और 2026 के बीच, केवल 85,000 वीज़ा स्थानों के लिए हर साल 450,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। हालांकि, इन कंपनियों को फिर भी वीज़ा प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। अध्ययन में कहा गया है कि कंपनियां इस बचत के कारण इन वीज़ा का लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं, और यह उच्च मांग को समझने में मदद करता है।
इस अध्ययन से यह बात भी सामने आई है कि एच-1बी वीज़ा धारक कर्मचारियों को कम वेतन देने का एक बड़ा कारण यह है कि वीज़ा धारक कंपनी से बंधे होते हैं। इसका मतलब यह है कि एक एच-1बी कर्मचारी को आसानी से किसी अन्य कंपनी में नौकरी बदलने का अवसर नहीं मिलता है। इस वजह से, कंपनियां इन कर्मचारियों को कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर कर सकती हैं, क्योंकि उन्हें यह डर नहीं होता कि कर्मचारी जल्दी नौकरी बदल लेंगे। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें
भविष्य में एच-1बी वीज़ा के लिए बढ़ेगा शुल्क
2027 से, एच-1बी वीज़ा प्राप्त करने वाली कंपनियों को 100,000 डॉलर का शुल्क देना होगा। यह नीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित की गई थी और इसका उद्देश्य दुरुपयोग को रोकना और आव्रजन सेवाओं के लिए धन जुटाना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, यह शोध यह बताता है कि कंपनियों की बचत इतनी अधिक होती है कि वे इस शुल्क को भी आसानी से वहन कर सकती हैं, बिना इसके चलते उनकी वीज़ा प्राप्ति में कोई बाधा आए।



