

Bihar Road Construction: बिहार की सड़कों पर अब सिर्फ सरकार का ही नहीं, ठेकेदारों का पसीना भी खूब बहेगा, क्योंकि राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नियम-कानूनों का नया खाका तैयार हो रहा है।
बिहार रोड कंस्ट्रक्शन: 50 करोड़ से ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए बनेंगे नए नियम, हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल भी लागू
बिहार सरकार सड़क निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठेकेदारों के लिए एक नई और सख्त नियमावली लाने की तैयारी में है। इस नई नियमावली का उद्देश्य निर्माण कार्यों में तेजी लाना, गुणवत्ता बढ़ाना और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर लगाम कसना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
राज्य में 50 करोड़ रुपये से अधिक के सभी सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए एक नई और विशेष श्रेणी बनाई जाएगी। यह कदम बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन और निष्पादन को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। नई नियमावली के तहत, ठेकेदारों को अब अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 70%, सड़क परियोजनाओं में निवेश करना होगा। यह व्यवस्था उनकी जवाबदेही बढ़ाएगी और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।
बिहार रोड कंस्ट्रक्शन: बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए खास श्रेणी
नई नियमावली में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है 50 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष श्रेणी का निर्माण। इस श्रेणी के तहत आने वाले ठेकेदारों को अधिक सख्त मानदंडों और नियमों का पालन करना होगा। इसका लक्ष्य है कि बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में कोई समझौता न हो और वे उच्च गुणवत्ता के साथ समय पर पूरी हों। यह पहल राज्य के समग्र इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को गति देगी।
राज्य में सड़क निर्माण के क्षेत्र में अक्सर ठेकेदारों द्वारा बरती जाने वाली लापरवाही पर लगाम लगाने के लिए भी कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं। नई नियमावली में आर्थिक दंड और ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने के स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे। इसका मतलब है कि यदि कोई ठेकेदार निर्धारित मानकों या समय-सीमा का पालन नहीं करता है, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है, और बार-बार की लापरवाही पर उसे भविष्य के ठेकों से वंचित भी किया जा सकता है।
लापरवाह ठेकेदारों पर शिकंजा: आर्थिक दंड और ब्लैकलिस्टिंग
वर्तमान में, ठेकेदारों की लापरवाही से कई बार परियोजनाओं में देरी होती है या उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। नई नियमावली इस समस्या को जड़ से खत्म करने का प्रयास करेगी। आर्थिक दंड के प्रावधान ठेकेदारों को अपने काम के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाएंगे। वहीं, ब्लैकलिस्टिंग का डर उन्हें उच्च मानकों का पालन करने के लिए मजबूर करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह न केवल सरकार के धन की बचत करेगा, बल्कि राज्य की जनता को बेहतर सड़कें भी मिलेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल: विकास की नई राह
बिहार सरकार सड़क निर्माण में हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) को भी लागू करने की तैयारी में है। यह मॉडल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) का एक उन्नत रूप है, जिसमें सरकार और निजी कंपनियां दोनों मिलकर निवेश करती हैं। इसमें निर्माण लागत का एक निश्चित प्रतिशत सरकार देती है, और बाकी का निवेश ठेकेदार करता है। फिर ठेकेदार को परियोजना के चालू होने के बाद सरकार द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए सालाना भुगतान किया जाता है। यह मॉडल ठेकेदारों को अपनी पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहित करेगा और परियोजनाओं के रखरखाव के लिए भी जवाबदेह बनाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करेगा कि सड़कें न केवल बनें, बल्कि लंबे समय तक अच्छी स्थिति में रहें, जिससे बिहार का आर्थिक विकास और मजबूत होगा।



