

Surya Grahan 2026: ब्रह्मांड की अलौकिक घटनाओं में सूर्य ग्रहण का अपना एक विशेष स्थान है, जो न केवल खगोलीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि ज्योतिषीय और आध्यात्मिक रूप से भी गहरा प्रभाव डालता है। जब राहु और केतु के प्रभाव से सूर्य कुछ क्षणों के लिए ओझल होते हैं, तो यह काल विशेष ऊर्जाओं से परिपूर्ण हो जाता है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर परिलक्षित होता है।
# सूर्य ग्रहण 2026: साल का पहला ग्रहण और उसके गहराते ज्योतिषीय प्रभाव
प्रभु इच्छा से संचालित यह ब्रह्मांड, प्रत्येक खगोलीय घटना के साथ एक नवीन ऊर्जा चक्र का सूत्रपात करता है। इसी क्रम में, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को, 17 फरवरी 2026 को साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण घटित होने जा रहा है। यह खगोलीय घटना अपने साथ कुछ विशिष्ट ज्योतिषीय प्रभाव लेकर आएगी, विशेषकर कुछ राशियों के लिए यह समय मानसिक स्तर पर तनावपूर्ण, संबंधों में कटुता और महत्वपूर्ण निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कालखंड आत्मचिंतन और संयम की मांग करता है, ताकि इसके नकारात्मक ज्योतिषीय प्रभाव से बचा जा सके। ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति के विचारों में भटकाव और मानसिक अशांति अनुभव हो सकती है। इस समय विशेष रूप से उन लोगों को अधिक सचेत रहने की आवश्यकता है जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्रमा कमजोर स्थिति में हैं। यह ज्योतिषीय प्रभाव कुछ व्यक्तियों के लिए अनावश्यक भय और चिंताओं को बढ़ा सकता है।
## सूर्य ग्रहण 2026: राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव और चुनौतियां
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण, ग्रहों की स्थिति के अनुसार, कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है। ऐसे समय में धैर्य और विवेक से काम लेना महत्वपूर्ण है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास लाभप्रद हो सकता है। रिश्तों में सौहार्द बनाए रखने के लिए अनावश्यक विवादों से बचें और वाणी पर संयम रखें। महत्वपूर्ण व्यावसायिक या व्यक्तिगत निर्णय लेने से पहले गहन विचार-विमर्श करें।
### ग्रहण काल के दौरान क्या करें और क्या न करें?
सनातन धर्म में ग्रहण काल को संवेदनशील माना गया है। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ फलदायी होता है:
* ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लें।
* गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।
* धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें।
* देव प्रतिमाओं का स्पर्श न करें।
* किसी भी नए कार्य की शुरुआत न करें।
### ग्रहण के उपरांत के उपाय
ग्रहण समाप्त होने के पश्चात स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इस दौरान दान का विशेष महत्व है। अपनी क्षमतानुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। ग्रहण के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए मंत्र जाप अत्यंत प्रभावी होता है।
ॐ घृणि सूर्याय नमः।
यह मंत्र सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने और ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में सहायक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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यह लेख आपको सूर्य ग्रहण के दौरान आध्यात्म और ज्योतिष के महत्व को समझने में सहायक होगा, ताकि आप इस समय का सदुपयोग कर सकें और किसी भी अनिष्ट से बच सकें।




