

Bihar Congress: बिहार की सियासत में कांग्रेस की स्थिति उस जलती हुई दीपक जैसी हो गई है, जिसकी लौ कभी भी बुझ सकती है। विधानसभा चुनाव के तीन माह बीत जाने के बाद भी पार्टी अपने विधायक दल का नेता नहीं चुन पाई है, जो उसके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
Bihar Congress में नेतृत्व का संकट: आखिर क्यों नहीं मिल रहा विधायकों को नेता?
Bihar Congress में नेतृत्व का गतिरोध: दिल्ली से पटना तक बैठकों का दौर जारी
Bihar Congress: बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर नेतृत्व का मुद्दा गहराता जा रहा है। विधानसभा चुनाव परिणाम आए तीन महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन पार्टी अभी तक अपने विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं कर पाई है। इस देरी ने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ा दी है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी कांग्रेस की आंतरिक रणनीति और नेतृत्व प्रक्रिया को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा लगातार बैठकें की जा रही हैं। इसके साथ ही प्रदेश स्तर पर भी कई कवायदें हुईं, लेकिन किसी भी बैठक या कवायद से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इस अनिर्णय की स्थिति के कारण, पार्टी में टूट का खतरा मंडराने लगा है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पार्टी के भीतर गुटबाजी और अलग-अलग धड़ों की अपनी-अपनी पसंद के चलते नेता चुनने की प्रक्रिया जटिल हो गई है। कई विधायक अपनी पसंद का नेता बनवाना चाहते हैं, जबकि केंद्रीय नेतृत्व किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो सभी को साथ लेकर चल सके और पार्टी को एकजुट रख सके। इस खींचातान के बीच, पार्टी के सामने अपनी पहचान और प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
कांग्रेस का बढ़ता आंतरिक संकट और भविष्य की राह
यह सिर्फ बिहार कांग्रेस का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कांग्रेस का आंतरिक कलह देश भर में कई राज्यों में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। नेतृत्व की स्पष्टता का अभाव, गुटबाजी और निर्णय लेने में देरी पार्टी की जड़ों को कमजोर कर रही है। बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में जहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ गठबंधन में रहकर कांग्रेस को एक मजबूत भूमिका निभानी थी, वहां ऐसी स्थिति चिंताजनक है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस जल्द से जल्द इस गतिरोध को खत्म नहीं करती है और एक मजबूत नेता का चुनाव नहीं करती है, तो इसका सीधा असर भविष्य के चुनावों पर पड़ेगा। साथ ही, यह बिहार में महागठबंधन के भीतर भी कांग्रेस की स्थिति को कमजोर करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस अनिश्चितता के माहौल में, यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान कब और कैसे इस मुद्दे को सुलझाता है। क्या वे किसी सर्वमान्य चेहरे को आगे ला पाएंगे, या फिर यह विवाद और गहराएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



