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फ़रवरी, 16, 2026
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फ्रैक्टल एनालिटिक्स IPO Listing: क्या हुआ जब उम्मीदें धुंधली पड़ गईं?

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IPO Listing: निवेशकों को फ्रैक्टल एनालिटिक्स के बहुप्रतीक्षित आईपीओ लिस्टिंग से भारी उम्मीदें थीं, लेकिन 16 फरवरी को शेयर बाजार में हुई इसकी शुरुआत ने कई लोगों को निराश किया। कंपनी के शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट हुए, जिससे निवेशकों को तत्काल कोई लाभ नहीं मिल सका। इस आर्टिकल में, हम फ्रैक्टल एनालिटिक्स के आईपीओ प्रदर्शन और निवेशकों पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

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फ्रैक्टल एनालिटिक्स IPO Listing: क्या हुआ जब उम्मीदें धुंधली पड़ गईं?

फ्रैक्टल एनालिटिक्स के आईपीओ को कुल मिलाकर 2 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला था, और इसके शेयर 900 रुपये के इश्यू प्राइस पर जारी किए गए थे। हालांकि, लिस्टिंग के दिन बीएसई पर शेयर 900 रुपये पर ही खुले, जबकि एनएसई पर इसकी शुरुआत 876 रुपये पर हुई। इस डिस्काउंट लिस्टिंग ने निवेशकों को 2.67 फीसदी का नुकसान पहुंचाया, जो उनकी लिस्टिंग गेन की उम्मीदों के विपरीत था।

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फ्रैक्टल एनालिटिक्स IPO Listing का शुरुआती बाजार प्रदर्शन

लिस्टिंग के बाद शुरुआती कारोबार में भी कंपनी के शेयरों में गिरावट जारी रही। बीएसई पर सुबह करीब 11 बजे तक, कंपनी के शेयर 4.16 फीसदी या 37.40 रुपये की गिरावट के साथ 862.60 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे। एनएसई पर भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी; शेयर 4.30 फीसदी या 38.70 रुपये तक फिसलकर 861.45 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। निवेशकों को उम्मीद के अनुसार लिस्टिंग गेन का फायदा नहीं मिला, जिससे उनके बीच उत्साह कम हुआ और शेयर गोते खा गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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कंपनी की आर्थिक स्थिति पर गौर करें तो, वित्त वर्ष 2025 में इसका शुद्ध मुनाफा 220.60 करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया था। साथ ही, कंपनी के रेवेन्यू में भी सालाना आधार पर 17 फीसदी की तेजी दर्ज की गई थी। चालू वित्त वर्ष में भी कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। अप्रैल-सितंबर 2025 की तिमाही में कंपनी को 70.90 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनी की वित्तीय बुनियाद मजबूत है, भले ही उसकी शुरुआती शेयर बाजार की यात्रा थोड़ी कठिन रही हो।

फ्रैक्टल एनालिटिक्स का आईपीओ 9 से 11 फरवरी के बीच खुला था और इसका कुल आकार 2,840 करोड़ रुपये था। यह इश्यू कुल मिलाकर 2.81 गुना सब्सक्राइब हुआ। हालांकि, हर श्रेणी में पूरी तरह मांग नहीं आई। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) का हिस्सा (एक्स-एंकर) 4.41 गुना भरा, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का कोटा 1.11 गुना और खुदरा निवेशकों का 1.10 गुना सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कर्ज चुकाने, ऑफिस सेटअप, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, मार्केटिंग और कंपनी के दूसरे कामों को पूरा करने के लिए करने वाली है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सबक

फ्रैक्टल एनालिटिक्स के आईपीओ की यह लिस्टिंग उन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है जो केवल लिस्टिंग गेन की उम्मीद में निवेश करते हैं। शेयर बाजार में निवेश हमेशा बाजार जोखिमों के अधीन होता है, और किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना और कंपनी की बुनियाद का गहन विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है। यह घटना दर्शाती है कि मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों के आईपीओ भी हमेशा तत्काल लाभ नहीं दे पाते हैं, और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अक्सर अधिक फायदेमंद होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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