

Bihar Politics: बिहार की सियासत में महिला सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है, जैसे तपती धूप में प्यासे को पानी की दरकार हो। राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रणविजय साहू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राज्य की महिलाओं के साथ लगातार ‘राजनीतिक छल’ किया जा रहा है।
बिहार की राजनीति में महिला सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का ‘छल’: रणविजय साहू का नीतीश पर सीधा हमला
बिहार की राजनीति में महिला सम्मान का मुद्दा: क्या सचमुच हो रहा है छल?
राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रणविजय साहू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर महिलाओं के प्रति ‘राजनीतिक छल’ का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बिहार में महिलाएं दशकों से अपने सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियां सिर्फ जुबानी जमा खर्च हैं। उनका कहना था कि नीतीश सरकार ने महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर देखा है, जबकि उनके वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रणविजय साहू के अनुसार, बिहार की महिलाओं के नाम पर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन बेहद लचर है। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। विधायक ने उदाहरण देते हुए कहा कि जीविका दीदियों को सिर्फ छोटी राशि देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया जा रहा है, जो कि वास्तविकता से परे है।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद को महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा पैरोकार बताते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी सरकार ने महिलाओं के साथ लगातार छल किया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। महिला सम्मान की बात करने वाली यह सरकार महिलाओं के मुद्दों पर उतनी गंभीर नहीं है, जितनी होनी चाहिए।” विधायक साहू ने आगे कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के नाम पर सिर्फ आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
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आरोप-प्रत्यारोप का दौर: क्या है सच्चाई?
इस मामले पर राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर राजद जैसे विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं सत्ताधारी जदयू और भाजपा गठबंधन इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अभूतपूर्व काम हुए हैं, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण देना और शराबबंदी जैसे फैसले शामिल हैं।
हालांकि, रणविजय साहू का कहना है कि आरक्षण और शराबबंदी जैसे फैसलों के बावजूद महिलाओं के प्रति अपराध कम नहीं हुए हैं और उन्हें समाज में अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह सिर्फ घोषणाएं करने के बजाय महिलाओं के लिए वास्तविक कल्याणकारी योजनाएं लाए और उनका पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव से पहले महिला सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का यह मुद्दा बिहार की सियासत में और कितनी तेजी पकड़ता है और इसका आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ता है।






