

Bihar Journalist Pension Scheme: राजनीतिक गलियारों में जब पत्रकार कल्याण की बात उठती है, तो अक्सर उम्मीदों और यथार्थ के बीच एक महीन पर्दा सा खिंच जाता है। बिहार विधानसभा में हालिया बहस ने इस पर्दे को कुछ हद तक हटाया है, जहां पत्रकारों को मिलने वाली पेंशन योजना पर गंभीरता से विचार-विमर्श हुआ।
बिहार जर्नलिस्ट पेंशन स्कीम: क्या पत्रकारों का भविष्य होगा सुरक्षित? विधानसभा में छिड़ी तीखी बहस!
बिहार जर्नलिस्ट पेंशन स्कीम: वर्तमान स्थिति और विधायक के सवाल
विधायक अजय कुमार ने सदन में इस अहम मुद्दे को उठाते हुए सरकार से योजना की वर्तमान स्थिति, पात्रता मानदंड और लाभार्थियों की संख्या पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मीडियाकर्मी समाज का चौथा स्तंभ हैं और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। विधानसभा में हुई इस चर्चा ने राज्य के पत्रकार समुदाय में नई उम्मीद जगाई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई पत्रकारों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि योजना के क्रियान्वयन में कुछ विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि बिहार पत्रकार सम्मान योजना एक महत्वपूर्ण पहल है और इसके तहत पात्र पत्रकारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि योजना की समीक्षा लगातार की जाती है ताकि इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में कुल 500 से अधिक पत्रकार इस योजना का लाभ ले रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पेंशन पात्रता मानदंड और भविष्य की राह
पेंशन योजना के तहत, पत्रकारों के लिए कुछ विशिष्ट पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनमें न्यूनतम 20 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव और 60 वर्ष की आयु सीमा शामिल है। हालांकि, विधायक अजय कुमार ने इन मानदंडों में सरलीकरण का सुझाव दिया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद पत्रकार इस योजना का लाभ उठा सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकारों को अक्सर इन औपचारिकताओं को पूरा करने में कठिनाई होती है, जिसके कारण वे इस लाभकारी पत्रकार सम्मान योजना से वंचित रह जाते हैं। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रक्रिया पारदर्शी और सुलभ हो।
इस बहस के दौरान यह बात भी सामने आई कि पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। सरकार ने संकेत दिया कि वे इन सुझावों पर गौर करेंगे और भविष्य में एक व्यापक पत्रकार कल्याण पैकेज लाने पर विचार कर सकते हैं। यह कदम न केवल पत्रकारों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगा बल्कि उन्हें बिना किसी दबाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता करने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा। पत्रकारिता के पेशे से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसे कदम ही लोकतंत्र को मजबूत कर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



