

Darbhanga News: जब हौसलों की उपजाऊ जमीन पर आइडिया का बीज पड़ता है, तो कामयाबी का विशाल पेड़ उगना तय है। मिथिला की धरती पर कुछ ऐसा ही करिश्मा देखने को मिला है, जहां इंजीनियरिंग के चार छात्रों के सपनों को वो उड़ान मिली है, जिसका इंतजार उन्हें बेसब्री से था।
दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के स्टार्टअप सेल के कुशल मार्गदर्शन में चार नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स ने एक बड़ी छलांग लगाई है। उद्योग विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित “स्टार्टअप बिहार” योजना के तहत इन चारों कंपनियों को 10 लाख रुपये का बीज अनुदान (सीड फंड) मिला है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
Darbhanga News: इन चार स्टार्टअप्स ने दिखाई अपनी प्रतिभा
स्टार्टअप सेल के संरक्षण में जिन चार स्टार्टअप्स को यह महत्वपूर्ण अनुदान प्राप्त हुआ है, उनका विवरण इस प्रकार है:
- अपफाउंड प्राइवेट लिमिटेड (कुमार तनिष्क): यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए बनाया गया है। यह मंच संस्थापकों, छात्रों, निवेशकों और मेंटर्स को एक साथ लाता है, ताकि छोटे शहरों की प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का सही अवसर मिल सके।
- पुनः एलएलपी (आयुष शर्मा): यह स्टार्टअप एक उन्नत बायोनिक कृत्रिम हाथ विकसित कर रहा है, जो मांसपेशियों से मिलने वाले संकेतों (EMG) को पढ़कर काम करता है। इसका लक्ष्य महंगे विदेशी कृत्रिम अंगों का एक किफायती और उच्च गुणवत्ता वाला भारतीय विकल्प तैयार करना है, जिससे दिव्यांगजनों का जीवन आसान हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- कलांगन प्राइवेट लिमिटेड (श्रुति मिश्रा): “कलांगन – कलाओं का आंगन” एक दरभंगा-आधारित ब्रांड है जो पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाता है। इसके तहत जूट बैग, कैनवास उत्पाद और घर की सजावट का सामान तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य स्थानीय कला को बढ़ावा देना और महिला रोजगार का सृजन करना है।
- वर्चुअलस्फेयर टेक्नोलॉजीज़ (आर्यमान कुमार): यह स्टार्टअप इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहा है। यह उद्योगों के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (RFID) मॉड्यूल, रीडर, और टैग जैसे तकनीकी समाधान विकसित करता है, जो इनोवेशन को नई दिशा दे रहा है।
इन सभी स्टार्टअप्स ने अपनी अनूठी अवधारणाओं को एक सफल व्यावसायिक मॉडल में बदला है। सरकार से मिली 10 लाख रुपये की यह सीड फंडिंग अब इन्हें अपने उत्पाद को और बेहतर बनाने, प्रोटोटाइप तैयार करने और बाजार में विस्तार करने में मदद करेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कॉलेज प्राचार्य ने दी बधाई, कहा- युवाओं को मिलता रहेगा समर्थन
इस शानदार उपलब्धि पर कॉलेज के प्राचार्य ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग नवाचार और उद्यमिता को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। यह सफलता हमारे छात्रों की कड़ी मेहनत और स्टार्टअप सेल के बेहतरीन मार्गदर्शन का नतीजा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हम भविष्य में भी अपने युवा उद्यमियों को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
संस्थान के स्टार्टअप सेल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले उद्यमी के रूप में तैयार करना है। यह सफलता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



