

Mohan Bhagwat Gorakhpur Visit: समाज में सद्भाव की डोर को मजबूत करने, विभिन्नता में एकता का संदेश देने और एक भारत श्रेष्ठ भारत की कल्पना को साकार करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की धरती से हुंकार भरी है।
रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गोरखपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एक ‘सामाजिक सद्भाव सम्मेलन’ में भाग लिया, जो संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का एक अहम हिस्सा था। संघ के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भागवत ने बाबा गंभीरनाथ सभागार में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में शहर के प्रमुख नागरिकों और स्वयंसेवकों को संबोधित किया। सम्मेलन से ठीक पहले, उन्होंने दीप प्रज्वलित कर संघ की सौ वर्ष की यात्रा और ‘पंच परिवर्तन’ की थीम पर आधारित एक आकर्षक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया।
मोहन भागवत गोरखपुर विजिट: शताब्दी वर्ष की यात्रा और पंच परिवर्तन
इसके बाद, सरसंघचालक ने स्वयं प्रदर्शनी का अवलोकन किया और संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरख प्रांत द्वारा आयोजित इस ‘सामाजिक सद्भाव’ सम्मेलन को तारामंडल स्थित बाबा गंभीरनाथ सभागार में संबोधित करते हुए भागवत ने जोर देकर कहा कि समाज की वास्तविक पहचान आपसी जुड़ाव से होती है, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ से। उन्होंने पाश्चात्य देशों के लेन-देन आधारित संबंधों की तुलना में भारतीय मानवीय रिश्तों की व्याख्या की, जो अपनेपन और आत्मीयता की भावना पर आधारित होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भागवत ने अपने संबोधन में भारत को सद्भावना और सामाजिक सौहार्द का एक वैश्विक केंद्र बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सभ्यतागत विचारधारा लेन-देन के रिश्तों से परे, एकता और आपसी जुड़ाव के गहरे अहसास में निहित है। भारत की अतुलनीय विविधता पर प्रकाश डालते हुए भागवत ने कहा कि हमारे रीति-रिवाजों, पहनावे और परंपराओं में भिन्नताएँ कभी विभाजन पैदा नहीं करतीं, क्योंकि हमारी अंतर्निहित सांस्कृतिक एकता ही हमारी वास्तविक पहचान है। उन्होंने मातृभूमि भारत को अपनी माता का दर्जा देते हुए कहा कि एक ही दिव्य चेतना हम सभी में निवास करती है, और यही वो अटूट बंधन है जो हमारी भिन्नताओं के बावजूद हमें एक सूत्र में पिरोए रखता है।
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सामाजिक एकता का आह्वान और संघ का आत्मनिरीक्षण
सरसंघचालक ने अपने व्याख्यान में इस बात पर जोर दिया कि किसी भी समाज की सुदृढ़ता केवल कानून-व्यवस्था से नहीं, बल्कि मजबूत सामाजिक सद्भाव से भी सुनिश्चित होती है। आरएसएस के गौरवशाली 100 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि यह केवल जश्न मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि गहन आत्मनिरीक्षण और भविष्य की दिशा तय करने का भी समय है। उन्होंने सामाजिक एकता को और अधिक सशक्त बनाने के लिए वर्ष में दो से तीन बार ब्लॉक स्तर पर बैठकें आयोजित करने का आह्वान किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। साथ ही, उन्होंने सभी समुदायों से जातिगत भेदभाव और संकीर्ण सरोकारों से ऊपर उठकर एक व्यापक और एकजुट हिंदू समाज के निर्माण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आग्रह किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





