

Darbhanga News: अदालत की चौखट पर जब इंसाफ की उम्मीदें टकटकी लगाए खड़ी हों और कटघरे में कोई ‘संत’ हो, तो सबकी निगाहें फैसले पर ही टिक जाती हैं। दरभंगा में भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला, जहां एक कथित संत की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन फैसला अगली तारीख के लिए सुरक्षित रख लिया गया।
Darbhanga News: बचाव और अभियोजन पक्ष ने क्या दी दलीलें
जिले के चर्चित महिला थाना कांड संख्या 182/25 से जुड़े मामले में सोमवार को पॉक्सो की विशेष न्यायाधीश प्रतिमा परिहार की अदालत में कथित संत राम उदित दास उर्फ मौनी बाबा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के वकील ने मौनी बाबा को निर्दोष बताते हुए उन्हें एक संत होने की दलील दी और अग्रिम जमानत की मांग की। वहीं, पॉक्सो के स्पेशल पीपी विजय कुमार ने इसका जोरदार विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामले में अग्रिम जमानत याचिका विचारणीय ही नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वादी के अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी ने भी इसे एक गंभीर सामाजिक अपराध बताते हुए जमानत का पुरजोर विरोध किया।
20 फरवरी को आएगा फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन सुनवाई के लिए अगली तारीख मुकर्रर कर दी। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में 20 फरवरी को फैसला सुनाया जाएगा, जिस पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं। सोमवार को भी इस मामले को लेकर कोर्ट परिसर में काफी गहमागहमी देखी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या है पूरा मामला?
मौनी बाबा पर आरोप है कि उन्होंने एक नाबालिग लड़की की शादी अपने भतीजे और शिष्य श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर से करा दी। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 4/6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले का सह-आरोपी श्रवण दास पहले से ही 17 जनवरी से न्यायिक हिरासत में है और उसकी जमानत याचिका 4 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट से खारिज हो चुकी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।



