

Uttar Pradesh News: लोकतंत्र के मंदिर में जब संवैधानिक मर्यादाएं तार-तार होती हैं, तो सवालों के घेरे में सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था आ जाती है। उत्तर प्रदेश के विधानमंडल सत्र में घटी एक घटना ने फिर इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या राजनीतिक विरोध की कोई सीमा नहीं? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान समाजवादी पार्टी के हंगामे को संवैधानिक और महिला गरिमा का अपमान करार दिया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के संबोधन के दौरान मुख्य विपक्षी दल का व्यवहार न केवल राज्य के संवैधानिक प्रमुख का अपमान है, बल्कि यह नारी गरिमा के भी विरुद्ध है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, और ऐसी संवैधानिक प्रक्रिया में मुख्य विपक्षी दल का यह रवैया अत्यंत निंदनीय है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल राज्य की संवैधानिक मुखिया होती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के प्रति विपक्षी दल का यह निरादरपूर्ण व्यवहार लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है और इसे घोर अनादर की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान और संवैधानिक प्रमुखों के प्रति आदर बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है। ऐसे आचरण से बचना चाहिए जो आने वाली पीढ़ियों को गलत दिशा में ले जाए। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष की मौजूदा प्रकृति को देखते हुए, उनसे संवैधानिक प्रमुख का सम्मान करने की उम्मीद करना ही व्यर्थ है।
Uttar Pradesh News: संवैधानिक परंपराओं का अपमान अस्वीकार्य
योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में हुए पिछले नौ वर्षों के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में उत्तर प्रदेश ने एक लंबी यात्रा तय की है और राष्ट्र तथा विश्व ने स्वीकार किया है कि राज्य में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने पिछली सरकारों पर संकीर्ण एजेंडा चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी सरकारों ने राज्य के भविष्य और उसके लोगों के साथ समझौता किया, जिससे प्रदेश अराजकता, अव्यवस्था और अपराध का गढ़ बन गया था।
मुख्यमंत्री ने ‘डबल इंजन’ सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि स्पष्ट इरादों और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता के कारण उत्तर प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था में बाधा बनने के बजाय एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बन गया है। प्रदेश अब राजस्व घाटे से उबरकर राजस्व अधिशेष की ओर अग्रसर है। विधानमंडल सत्र में यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई कि कैसे राज्य ने कानून-व्यवस्था और आर्थिक मोर्चे पर शानदार प्रगति की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नारी शक्ति और युवा उत्थान: नए उत्तर प्रदेश की पहचान
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि आज राज्य में कानून का राज स्थापित है। रिकॉर्ड संख्या में पुलिस भर्तियां हुईं और महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। युवाओं के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गईं। आधुनिक पुलिस व्यवस्था, मजबूत साइबर एवं फोरेंसिक बुनियादी ढांचे के विकास पर लगातार काम किया गया है। ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति ने उत्तर प्रदेश को एक नई पहचान दी है। राज्य में त्योहारों और मंदिरों से जुड़ी अर्थव्यवस्था फली-फूली है। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि माघ मेले के दौरान 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी नदी में स्नान किया और 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी पर राष्ट्रीय नायकों और धार्मिक परंपराओं का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है, लेकिन सपा ने ‘गाजी के मेले’ का समर्थन किया, कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाए और राम मंदिर व काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का विरोध किया। उन्होंने याद दिलाया कि सपा ने राम भक्तों पर गोली चलाने का आदेश दिया था और एक बार अदालतों में यह भी कहा था कि राम और कृष्ण सिर्फ मिथक हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सपा ने वंदे मातरम का भी अपमान किया। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि उन्हें राष्ट्रगान से क्या समस्या है, क्योंकि राष्ट्रगान का अपमान संविधान का अपमान है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






