

Health Insurance Claim: जब लोग अपनी भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए बीमा खरीदते हैं, तो उनका एक ही मकसद होता है – मुश्किल घड़ी में आर्थिक सुरक्षा। लेकिन क्या सिर्फ प्रीमियम भरना पर्याप्त है, या असली परीक्षा क्लेम के समय होती है? हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया जिसने बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हुआ रिजेक्ट, ग्राहक परेशान: क्या सिर्फ कागजी वादा बनकर रह गया है स्वास्थ्य बीमा?
एक बेटे ने अपनी मां के लिए हर साल करीब 50 हजार रुपये का प्रीमियम भरकर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। उसे पूरा भरोसा था कि जरूरत पड़ने पर यह बीमा कंपनी उसकी मदद करेगी। लेकिन जब सच में इलाज की जरूरत पड़ी, तो उसका **हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम** खारिज कर दिया गया। यह घटना बीमा धारकों के बीच बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है कि बीमा खरीदना एक बात है, लेकिन क्लेम पास करवाना दूसरी।
जब हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम हुआ खारिज: एक बेटे की आपबीती
इस व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि कैसे उसने Star Health and Allied Insurance के लखनऊ कार्यालय से संपर्क किया, लेकिन उसे घंटों इंतजार करना पड़ा और अंततः उसका क्लेम रद्द कर दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उसने आरोप लगाया कि कंपनी के प्रतिनिधि ने कथित तौर पर कहा, “हमने आपसे पूछकर थोड़ी पॉलिसी ली थी।” इस चौंकाने वाली घटना ने सोशल मीडिया पर बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। कई यूजर्स ने यह सवाल उठाया कि कंपनियां प्रीमियम तो समय पर वसूल लेती हैं, लेकिन जब क्लेम की बात आती है तो इतनी सख्ती क्यों दिखाती हैं? लोगों का मानना है कि कई बार एक अच्छी Insurance Policy होने के बावजूद भी ग्राहक को दर-बदर भटकना पड़ता है।
कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि स्वास्थ्य बीमा अब केवल एक कागजी वादा बनकर रह गया है, जिसकी हकीकत क्लेम के समय सामने आती है। वहीं, कई यूजर्स ने सरकारी नियामक संस्थाओं को टैग करते हुए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
हालांकि, कंपनी ने भी सार्वजनिक रूप से इस मामले पर अपना पक्ष रखा है। Star Health का कहना है कि क्लेम को सभी उपलब्ध दस्तावेजों और सत्यापित मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर गहन जांच के बाद ही परखा गया, और उसी के अनुरूप निर्णय लिया गया।
बीमा क्लेम खारिज होने के प्रमुख कारण और बचाव के तरीके
बीमा मामलों में क्लेम खारिज होने के कई सामान्य कारण होते हैं, जिनकी जानकारी हर पॉलिसीधारक को होनी चाहिए। अक्सर क्लेम पॉलिसी की शर्तों, जैसे वेटिंग पीरियड (प्रतीक्षा अवधि), पूर्व-विद्यमान बीमारी (pre-existing disease) के अपर्याप्त खुलासे, या जरूरी दस्तावेजों की कमी के आधार पर खारिज किए जाते हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि किसी भी Insurance Policy को लेते समय उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना कितना आवश्यक है। कवरेज की सीमाओं को समझना और सभी मेडिकल दस्तावेजों को सही तरीके से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, ताकि जरूरत के समय क्लेम प्रक्रिया में कोई परेशानी न हो। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह मामला दिखाता है कि बीमा सुरक्षा का वादा करने वाली कंपनियों के लिए पारदर्शिता और ग्राहक सेवा कितनी महत्वपूर्ण है। ग्राहकों को भी अपनी पॉलिसी के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए और हर बारीकी को समझना चाहिए ताकि आपात स्थिति में उन्हें निराशा न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



