

Amavasya 2026: फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह दिन विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए समर्पित है। आज, 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या है, और इस पावन तिथि पर पितरों के तर्पण तथा उनके निमित्त दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए दान से पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि, आरोग्य तथा दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए जानते हैं कि इस महत्वपूर्ण दिन पर किन चीजों का दान करने से पितरों को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
फाल्गुन अमावस्या 2026: पितरों की शांति और सुख-समृद्धि के लिए करें विशेष दान
फाल्गुन अमावस्या 2026 पर दान का महत्व और नियम
फाल्गुन अमावस्या का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने और फिर पितरों के निमित्त **पितृ तर्पण** करने का विधान है। दान-पुण्य के कार्य इस दिन विशेष फलदायी होते हैं। ऐसी मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर किए गए दान सीधे हमारे पूर्वजों तक पहुंचते हैं और उन्हें मुक्ति व शांति प्रदान करते हैं। दान करते समय मन में शुद्ध भाव और श्रद्धा होनी चाहिए। किसी भी वस्तु का दान निस्वार्थ भाव से करना चाहिए, तभी उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। जब आप दान करें, तो इस बात का ध्यान रखें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
फाल्गुन अमावस्या 2026: शुभ मुहूर्त और दान विधि
फाल्गुन अमावस्या 2026 का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
| विवरण | समय |
| :———— | :——————————– |
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 17 फरवरी 2026, प्रातः 05 बजकर 43 मिनट से |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 18 फरवरी 2026, प्रातः 02 बजकर 40 मिनट तक |
**दान की विधि:**
* प्रातःकाल उठकर पवित्र स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* सूर्य देव को अर्घ्य दें और पितरों का स्मरण करें।
* अपनी सामर्थ्य अनुसार दान की वस्तुओं का संकल्प लें।
* ब्राह्मणों, गरीबों या जरूरतमंदों को श्रद्धापूर्वक दान करें।
* दान करते समय पितरों की शांति और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
फाल्गुन अमावस्या पर इन चीजों का दान करें
फाल्गुन अमावस्या के दिन कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से पितरों को विशेष शांति मिलती है और **पितृ तर्पण** का पूर्ण फल प्राप्त होता है:
* **अन्न दान:** चावल, गेहूं, दाल आदि का दान महादान माना जाता है। यह पितरों को तृप्ति प्रदान करता है।
* **वस्त्र दान:** गरीबों और जरूरतमंदों को नए वस्त्र दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
* **तिल दान:** काले तिल का दान पितरों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पितृ दोषों को शांत करने में सहायक होता है।
* **गुड़ और घी:** गुड़ और घी का दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पितर संतुष्ट होते हैं।
* **कंंबल या गर्म कपड़े:** यदि मौसम ठंडा हो, तो गरीबों को कंंबल या गर्म कपड़े दान करना बहुत पुण्यकारी होता है।
* **जलपात्र:** मिट्टी के जलपात्र या अन्य बर्तन दान करना भी शुभ माना जाता है।
* **ब्राह्मण भोजन:** इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और उन्हें दक्षिणा देना अत्यंत फलदायी होता है।
ॐ पितृभ्यो नमः।
ॐ सर्व पितृ देवाय नमः।
निष्कर्ष और उपाय
फाल्गुन अमावस्या का दिन पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने का एक सुनहरा अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए दान-पुण्य के कार्य निश्चित रूप से शुभ फल प्रदान करते हैं। पितरों की आत्मा की शांति के लिए यह दिन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अधिक जानकारी के लिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन किए गए अनुष्ठान और दान से न केवल पितर प्रसन्न होते हैं, बल्कि व्यक्ति को भी मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
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