

Amavasya: भारतीय संस्कृति में प्रत्येक तिथि और पर्व का अपना विशेष महत्व है, जो हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से प्रभावित करता है। अमावस्या, चंद्र पंचांग की वह तिथि है जब चंद्रमा पूर्ण रूप से अदृश्य होता है, और यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह समय है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं विशेष रूप से सक्रिय होती हैं, और ऐसे में कुछ नियमों का पालन करना शुभ फलदायी माना गया है। प्राचीन ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन बालों को न धोने की परंपरा चंद्रमा, पित्र तिथि और सूक्ष्म ऊर्जा संतुलन से गहराई से जुड़ी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस दिन बालों को धोने से क्यों बचना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अमावस्या पर क्यों नहीं धोते बाल: जानिए ज्योतिषीय और धार्मिक कारण
अमावस्या और ऊर्जा संतुलन: बालों से संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के दिन चंद्रमा अपनी सबसे कमजोर स्थिति में होता है। चंद्रमा को मन, जल और भावनाओं का कारक ग्रह माना जाता है। जब चंद्रमा कमजोर होता है, तो इसका प्रभाव हमारे शरीर में जल तत्व और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन बालों को धोने से शरीर का आंतरिक ऊर्जा संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। यह मानसिक अशांति, बेचैनी और निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
धार्मिक ग्रंथों में अमावस्या को पित्रों को समर्पित तिथि माना गया है। इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। अमावस्या के दिन बाल धोना कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह पित्रों के प्रति किए जाने वाले सम्मान और पवित्रता में बाधा डाल सकता है। इस दिन दान-पुण्य और पित्रों के लिए किए गए कर्मों का विशेष फल मिलता है, और ऐसे में शरीर की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि किसी भी प्रकार का पित्र दोष न लगे।
शरीर में ऊर्जा संतुलन का सिद्धांत भी अमावस्या पर बाल न धोने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है। हमारे बाल शरीर के ऊर्जा क्षेत्र और कुंडलिनी शक्ति से जुड़े माने जाते हैं। अमावस्या के दिन, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं परिवर्तित होती हैं, बालों को धोने से शरीर की ऊर्जा को नुकसान पहुँच सकता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो साधना या आध्यात्मिक कार्यों में लीन रहते हैं। ऐसे में, इस दिन बालों को धोना ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अतः, ज्योतिषीय और धार्मिक दोनों ही दृष्टियों से अमावस्या के दिन बालों को न धोना एक प्राचीन और शुभ परंपरा है। यह न केवल हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन, व्यक्ति को शांत रहना चाहिए, सात्विक भोजन करना चाहिए और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, दान करना और अपने पित्रों का स्मरण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह परंपरा हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को संरक्षित रखने की प्रेरणा देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।



