

KCR Birthday: तेलंगाना की सियासत के शिखर पुरुष, जिन्होंने एक राज्य के सपने को हकीकत में बदला, आज अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं। Telangana politics में उनका स्थान अद्वितीय है। संघर्षों से भरी उनकी राजनीतिक यात्रा, एक छात्र नेता से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर, कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। आज उनके जन्मदिन पर, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए जानते हैं के. चंद्रशेखर राव के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में।
KCR Birthday: एक परिचय और प्रारंभिक जीवन
आज, 17 फरवरी को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सुप्रीमो और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव, जिन्हें लोकप्रिय रूप से केसीआर के नाम से जाना जाता है, अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले केसीआर ने तेलंगाना राज्य की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। उनकी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), का नाम बदलकर बाद में भारत राष्ट्र समिति कर दिया गया।
केसीआर का जन्म 17 फरवरी 1954 को तेलंगाना के चंतामदका गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम राघवार राव और माता का नाम वेंकटम्मा है। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा उस्मानिया विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री के साथ पूरी की। इससे पहले, उन्होंने सिद्धिपेट डिग्री कॉलेज से तेलुगु साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान जैसे वैकल्पिक विषयों के साथ स्नातक किया था।
केसीआर ने अपनी सियासी यात्रा की शुरुआत छात्र राजनीति से की। सिद्धिपेट डिग्री कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, हालांकि इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। डिग्री पूरी करने के बाद वे दिल्ली की राजनीति में कदम रखना चाहते थे और 1975 में दिल्ली भी गए, लेकिन उसी दौरान देश में आपातकाल लागू हो गया। इस परिस्थिति में, केसीआर संजय विचार मंच से जुड़े। संजय गांधी के निधन के बाद वे वापस सिद्धिपेट लौट आए।
एक बार, तत्कालीन मुख्यमंत्री मैरी चेन्ना रेड्डी एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने सिद्धिपेट आए थे। मंच पर केसीआर भाषण दे रहे थे। जब उनका भाषण समाप्त होने वाला था, तब मुख्यमंत्री रेड्डी ने उनके वक्तृत्व कौशल से प्रभावित होकर कहा कि यह युवक अच्छा बोल रहा है, इसे बोलने दो। इस घटना ने उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को और मजबूत किया।
केसीआर का लंबा राजनीतिक सफर
साल 1980 में, संजय गांधी के मार्गदर्शन में केसीआर आंध्र प्रदेश युवा कांग्रेस में शामिल हुए। 1982 में, वे राघवपुर प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, सिद्धिपेट के अध्यक्ष चुने गए और बाद में युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी बने। 1985 में, उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का दामन थामा और उसी साल सिद्धिपेट से विधायक चुने गए। 1987 में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया और 1989 में वे फिर से सिद्धिपेट से विधायक बने।
1989 से 1993 तक, केसीआर टीडीपी के जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। इसके बाद 1993 में उन्हें टीडीपी का राज्य सचिव नियुक्त किया गया। वे लगातार राजनीति में ऊंचे मुकाम हासिल करते रहे। 1997 में, उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री का पद मिला और 1999 में वे विधानसभा के उपसभापति बनाए गए। 2001 में, उन्होंने विधायक और उपसभापति दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उनकी नजर अब एक बड़े लक्ष्य पर थी।
तेलंगाना राज्य के गठन की मांग जोर पकड़ने लगी थी। 2009 में, केसीआर ने तेलंगाना के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया, जिसने आंदोलन को एक नई दिशा दी। 9 दिसंबर को, केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। हालांकि, सीमांध्र और रायलसीमा के सांसदों और विधायकों के इस्तीफों के कारण यह प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुकी। लेकिन 18 फरवरी 2014 को लोकसभा से तेलंगाना विधेयक पारित हो गया। कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद, अंततः 2 जून 2014 को तेलंगाना राज्य का उदय हुआ। इसी दिन, केसीआर तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री बने। 2018 में वे दूसरी बार तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए, जो उनकी असाधारण Telangana politics की गहरी समझ को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
उनकी राजनीतिक विरासत और तेलंगाना के निर्माण में उनका योगदान, भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



