

Bihar Education Scam: बिहार की सियासत में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक ऐसा बवंडर उठा है, जिसने सरकार की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप ऐसे हैं, जो पारदर्शिता के दावों की हवा निकाल रहे हैं, और सत्ताधारी दल का ही एक विधायक अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
मामला बिहार विधानसभा के भीतर गूंजा, जहां शिक्षा विभाग में बेंच-डेस्क खरीद को लेकर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मुद्दा गरमा गया। इस मामले में संलिप्तता के आरोपों का सामना कर रहे एक जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को पदोन्नति दिए जाने के बाद, सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक ने सदन के पटल पर अपनी ही सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस अधिकारी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं, उसे कैसे उच्च पद पर पदोन्नत किया जा सकता है। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बिहार शिक्षा घोटाले की आग विधानसभा तक
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। अधिकारियों के मनमाने रवैये और कथित मिलीभगत से सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। विधायक का आरोप है कि इस पदोन्नति से गलत संदेश जा रहा है और यह उन अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन है जो नियमों को ताक पर रखकर काम करते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इस मुद्दे पर विधानसभा में भारी हंगामा देखने को मिला, विपक्षी दलों ने भी सरकार से जवाब मांगा। हालांकि, सरकार की ओर से इस मामले पर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं आया, जिससे सत्ता पक्ष के भीतर भी बेचैनी बढ़ गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग
विधायक ने अपनी मांग दोहराई कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उन्हें इनाम दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार इसी तरह जारी रहा तो बच्चों के भविष्य पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाती है और क्या संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है।





