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फ़रवरी, 17, 2026
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अमावस्या के पावन दिन पर क्यों नहीं धोना चाहिए बाल? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

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Amavasya: भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और इस दिन कई नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक नियम है अमावस्या के दिन बाल न धोने का। आइए, जानते हैं कि ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में इस परंपरा के पीछे क्या गूढ़ रहस्य छिपे हैं।

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अमावस्या के पावन दिन पर क्यों नहीं धोना चाहिए बाल? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

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Amavasya: भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और इस दिन कई नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक नियम है अमावस्या के दिन बाल न धोने का। आइए, जानते हैं कि ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में इस परंपरा के पीछे क्या गूढ़ रहस्य छिपे हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के दिन चंद्रमा की कलाएं क्षीण हो जाती हैं, जिससे पृथ्वी पर उसकी सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो जाता है। ऐसे में नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रभाव बढ़ने की संभावना होती है। कई बार लोग अनजाने में ऐसे कर्म कर बैठते हैं, जिससे उन्हें पितृ दोष का सामना करना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अमावस्या तिथि पर बाल धोने से शरीर की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है, जो व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इस दिन तर्पण और पिंडदान जैसे कार्य करने का विधान है, जिससे पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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यह भी पढ़ें:  Surya Grahan 2026: क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?

अमावस्या और ऊर्जा संतुलन का रहस्य

धार्मिक और ज्योतिषीय कारण

अमावस्या को पितरों की तिथि माना गया है। इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन पितर लोक से पितर अपने वंशजों के यहां आते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं। यदि इस दिन व्यक्ति स्वच्छता के नाम पर बाल धोता है, तो यह पितरों के प्रति अनादर का भाव माना जा सकता है। बालों को धोने से शरीर से एक प्रकार की ऊर्जा का क्षय होता है, जिसे इस पवित्र दिन पर बचाना शुभ माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और जल का कारक माना गया है। अमावस्या पर चंद्रमा अपनी पूर्ण शक्ति में नहीं होता, जिससे मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है। बाल धोने से शरीर में जल तत्व की प्रधानता बढ़ती है, जो अमावस्या के दिन मानसिक उथल-पुथल को और बढ़ा सकता है। यह भी कहा जाता है कि अमावस्या के दिन वातावरण में मौजूद सूक्ष्म नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय होती हैं। बालों के माध्यम से ये शक्तियां शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

क्या करें और क्या न करें

अमावस्या के दिन यदि आवश्यक न हो तो बालों को धोने से बचें। यदि अत्यधिक आवश्यकता हो, तो केवल सामान्य जल से स्नान किया जा सकता है, लेकिन बालों में शैम्पू या साबुन का प्रयोग वर्जित माना जाता है। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें, क्रोध से बचें और अधिक से अधिक समय ईश्वर के ध्यान तथा पितरों के स्मरण में लगाएं। दान-पुण्य के कार्य करने से विशेष लाभ मिलता है और पितृ दोष की शांति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है, परंतु बालों को विशेष रूप से धोने से बचना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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