

Fodder Scam: सियासत के गलियारों में दशकों पुराने एक घोटाले का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है, जिसने बिहार से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल मचा दी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़ा यह बहुचर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनकी सजा निलंबन के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।
Fodder Scam मामले में CBI ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। देवघर जिला कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाला मामले में उन्हें मिली सजा के निलंबन को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जांच एजेंसी ने अपनी याचिका में दलील दी है कि चारा घोटाले जैसे गंभीर आर्थिक अपराध में सजा को निलंबित करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। सीबीआई का मानना है कि इस तरह के फैसलों से न्यायिक प्रक्रिया और जनता के विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंगलवार को इस याचिका पर हुई शुरुआती सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि इस पर अप्रैल महीने में विस्तार से विचार किया जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि इस घोटाले से जुड़े कई मामले वर्षों से लंबित हैं, जिनका अब चरणबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना आवश्यक है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
न्यायपीठ ने क्या कहा?
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि जिन मामलों में आरोपियों का निधन हो चुका है, उन फाइलों को बंद कर दिया जाएगा। वहीं, जिन मामलों में आरोपी जीवित हैं और उनकी सजा या सजा के निलंबन से जुड़े सवाल उठ रहे हैं, उन पर अलग-अलग सुनवाई की जाएगी। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि चारा घोटाला कोई एक अकेला मामला नहीं, बल्कि कई कोषागारों से जुड़ा एक व्यापक घोटाला है।
अदालत की इस टिप्पणी से यह साफ है कि मामले की जटिलता को देखते हुए हर पहलू पर गहराई से विचार किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी वजह से देवघर कोषागार से जुड़े मामले में सीबीआई की याचिका पर अप्रैल में विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है, जो इस केस की भविष्य की दिशा तय करेगा।
अप्रैल में होगी विस्तृत सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अप्रैल में सुनवाई की तारीख तय करने के बाद एक बार फिर सभी की निगाहें इस मामले पर टिक गई हैं। यह सुनवाई न केवल लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य के लिए, बल्कि देश में आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में एक नजीर भी स्थापित कर सकती है। अदालत का रुख यह तय करेगा कि सजा के निलंबन को लेकर कानूनी मापदंड क्या होने चाहिए और दशकों पुराने मामलों का निपटारा किस गति से किया जाना चाहिए।





