

Bihar Politics: बिहार की सियासत में आजकल छोटे से छोटे मुद्दे भी बड़े भूचाल लाने का माद्दा रखते हैं, और जब बात एक आईएएस अधिकारी की महंगी चार्टर्ड प्लेन यात्रा की हो, तो तूफान उठना तय है। मामला सिर्फ फिजूलखर्ची का नहीं, बल्कि इसे जातिगत रंग देकर बहस को नई दिशा देने का भी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में गरमाहट चरम पर है।
बिहार पॉलिटिक्स: क्या है आईएएस अधिकारी की विवादित यात्रा का पूरा मामला?
Bihar Politics: बिहार में इन दिनों एक आईएएस अधिकारी की चार्टर्ड प्लेन में यात्रा को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। 2011 बैच के आईएएस अधिकारी निलेश देवरे की इस महंगी उड़ान ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नीतीश सरकार के भीतर भी इसे लेकर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। यह मामला तब प्रकाश में आया जब देवरे को एक निजी चार्टर्ड विमान में यात्रा करते देखा गया, जिसके बाद उनकी यात्रा के औचित्य और वित्तीय भार पर सवाल उठने लगे। इस घटना ने एक बार फिर नौकरशाही में फिजूलखर्ची और पारदर्शिता की बहस को तेज कर दिया है।
हालांकि, इस विवाद को तब एक नया मोड़ मिला जब राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने इसमें जातिगत एंगल जोड़ दिया। उन्होंने इस पूरे मामले को एक विशेष जाति से जोड़ते हुए कहा कि आईएएस निलेश देवरे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद, यह मुद्दा सिर्फ एक अधिकारी की यात्रा से कहीं बढ़कर, बिहार की दशकों पुरानी जातिगत राजनीति का अखाड़ा बन गया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंत्री चौधरी के अनुसार, यह मामला कुछ और नहीं बल्कि एक अधिकारी को उसकी पृष्ठभूमि के कारण परेशान करने का प्रयास है।
चौधरी के इस बयान ने सत्ताधारी गठबंधन के भीतर भी हलचल मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर है और आईएएस अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मंत्री का यह बचाव कई नए सवाल खड़े कर रहा है। क्या वाकई इस यात्रा के पीछे कोई जातिगत साज़िश है, या फिर यह सिर्फ एक बचाव की रणनीति है? आईएएस अधिकारी निलेश देवरे से जुड़े इस विवाद पर देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह प्रश्न फिलहाल अनुत्तरित है और राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार के लिए एक संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि ऐसे समय में जब राज्य वित्तीय संकट से जूझ रहा है और आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, तब एक आईएएस अधिकारी का इस तरह चार्टर्ड प्लेन में सफर करना जनता के पैसे की बर्बादी का प्रतीक है। उनकी मांग है कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे। इस बीच, प्रशासनिक हलकों में भी इस बात पर फुसफुसाहट है कि क्या ऐसे मामलों में अधिकारियों के लिए सख्त दिशानिर्देश बनाए जाने चाहिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सियासी गलियारों में गरमागरम बहस और भविष्य की चुनौतियां
यह विवाद केवल एक आईएएस अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने बिहार की नौकरशाही में व्याप्त कथित फिजूलखर्ची और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे से कैसे निपटती है। क्या मंत्री अशोक चौधरी का जातिगत कार्ड काम करेगा, या फिर प्रशासन को अपनी पारदर्शिता साबित करनी होगी? आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की राजनीति में और गरमाहट ला सकता है, और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार में राजनीति का हर रंग कब और कैसे बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




