spot_img

Darbhanga News: LNMU में इंसान के जज्बात, खुशी-गम, दोस्ती और Mirza Ghalib… प्रासंगिक हैं आज भी ग़ालिब- ‘कोई ग़ालिब न हुआ’ पढ़िए… न था कुछ तो…, कुछ न होता तो…

spot_img
- Advertisement -

Mirza Ghalib: वक़्त की रेत पर कुछ शायर ऐसे नक़्श छोड़ जाते हैं, जो सदियों की आंधियों से भी नहीं मिटते। मिर्ज़ा ग़ालिब उसी कहकशां के सबसे रौशन सितारे हैं, जिनकी प्रासंगिकता पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) में विद्वानों ने गहन मंथन किया। विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “आधुनिक युग में कलाम-ए-ग़ालिब की प्रासंगिकता” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें ग़ालिब के कलाम को वर्तमान समय की कसौटी पर परखा गया।

- Advertisement -

क्यों आज भी दिलों पर राज़ करते हैं Mirza Ghalib?

कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए पूर्व रजिस्ट्रार व चंदधारी महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर मुस्ताक अहमद ने कहा कि मिर्ज़ा ग़ालिब का कलाम इंसान के जज्बात, खुशी-गम और दोस्ती को केंद्र में रखता है, जो सदाबहार है। उन्होंने कहा कि आज के सामाजिक उथल-पुथल, अकेलेपन और दार्शनिक जिज्ञासाओं के दौर में ग़ालिब की शायरी एक मशाल की तरह राह दिखाती है। प्रोफेसर अहमद ने जोर देकर कहा, “ग़ालिब के शेर केवल प्रेम या विरह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन के वास्तविक तर्कवाद और अस्तित्व के संघर्षों को भी दर्शाते हैं।”

- Advertisement -

Darbhanga News: LNMU में इंसान के जज्बात, खुशी-गम, दोस्ती और Mirza Ghalib... प्रासंगिक हैं आज भी ग़ालिब- 'कोई ग़ालिब न हुआ' पढ़िए... न था कुछ तो..., कुछ न होता तो...

- Advertisement -

प्रोफेसर मुस्ताक ने ग़ालिब के प्रसिद्ध शेर “न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता, डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता” की व्याख्या करते हुए कहा कि यह हिंदुस्तान की सरजमीं की रवायत और वैदिक संस्कृति की गहरी समझ के बिना नहीं लिखा जा सकता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने ग़ालिब के बनारस प्रवास का जिक्र करते हुए कहा कि ‘चिराग़-ए-दैर’ में ग़ालिब ने दुनिया के बचे रहने की वजह निःस्वार्थ मोहब्बत और दुआ को बताया, जो उन्हें बनारस में देखने को मिली।

यह भी पढ़ें:  Darbhanga News: किस्मत रूठी है नगर परिषद की... गैस सिलेंडर के लिए इंतजार... 20 साल बाद भी शहरी सुविधा से वंचित उपभोक्ता, प्रशासन से मांगी जल्द राहत

ग़ालिब का कलाम: जिज्ञासा और दर्शन का संगम

सेमिनार के संयोजक और पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद आफ़ताब अशरफ ने कहा कि ग़ालिब की विशेषता यह है कि वे किसी भी चीज़ को अंतिम सत्य नहीं मानते। वे कहते थे कि यह कायनात निर्माण के विभिन्न पड़ावों से गुज़र रही है और हमें नई सृष्टि का स्वागत करने के लिए अपने हृदय में विशालता रखनी चाहिए। उन्होंने ग़ालिब की निर्भीकता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कलम बिना किसी डर के चलाई। आज का युग विज्ञान और आधुनिकीकरण का है, लेकिन मनुष्य का चित्त उजाड़ होता जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ऐसे में ग़ालिब की शायरी हमें रुककर सोचने पर मजबूर करती है।

सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद हसन ने कहा कि ग़ालिब का काल दृढ़ विश्वास का था, जबकि हमारा युग हर कथन को परखना चाहता है। ग़ालिब के कलाम में जो जिज्ञासा है, वह हमारे युग की विशेषता है, और यही उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद इफ़्तेख़ार अहमद ने कहा कि ग़ालिब का काव्य हमारी जीवन यात्रा का सहयोगी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके विचारों की प्रफुल्लता और दृष्टि की विशालता हमें नई शक्ति प्रदान करती है।

कार्यक्रम का सफल संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद मोतिउर रहमान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया। इस अवसर पर डॉ. नसरीन सुरैया, डॉ. शंकर कुमार, डॉ. जियाउल हक, डॉ. मोहम्मद खालिद अंजुम उस्मानी समेत कई अन्य विद्वान, शिक्षक और छात्र उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सेमिनार ग़ालिब की शायरी के उन पहलुओं को उजागर करने में सफल रहा जो आज भी हमारे जीवन को दिशा दे सकते हैं।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Bihar Weather: बिहार में कहीं बारिश-आंधी, कहीं लू का अलर्ट, 19 अप्रैल से बढ़ेगी मुश्किलें

Bihar Weather: बिहार इस वक्त मौसम के अजीबोगरीब मिजाज से जूझ रहा है। राज्य...

Darbhanga News: कमाल CBSE 10th Result घनश्यामपुर के बाल कल्याण पब्लिक स्कूल का जलवा, संध्या कुमारी बनीं जिला टॉपर

CBSE 10th Result: बिहार के सुदूर देहाती इलाके में स्थित बाल कल्याण पब्लिक स्कूल,...