

Darbhanga News: लाल ईंटों से घर तो बनते हैं, लेकिन इन ईंटों को बनाने वालों के बही-खाते जब लाल होने लगते हैं, तो प्रशासन की नजरें टेढ़ी हो ही जाती हैं। दरभंगा में ईंट भट्ठा व्यवसायियों के साथ विभागीय अधिकारियों की बैठक में कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला, जहां टैक्स भुगतान को लेकर कड़े निर्देश दिए गए।
Darbhanga News: टैक्स चोरी पर नकेल, पारदर्शिता पर जोर
दरभंगा के सूरज बैंक्विट हॉल में मंगलवार को ईंट भट्ठा व्यावसायिक संघ, खनन विभाग और वित्त (वाणिज्य कर) विभाग के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा टैक्स भुगतान में पारदर्शिता लाना और राज्य के राजस्व को बढ़ाना था। बैठक में अधिकारियों ने साफ कर दिया कि टैक्स की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

बैठक को संबोधित करते हुए राज्य कर संयुक्त आयुक्त–1 प्रतिमा कुमारी ने व्यवसायियों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपने कोयले के स्टॉक, ईंटों के उत्पादन और बिक्री का सही-सही ब्योरा दें और उसी आधार पर ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करें। उन्होंने कहा कि यदि सही तरीके से कर का भुगतान होता है, तो इससे न केवल राज्य का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि व्यवसायियों को भी किसी तरह की विभागीय कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अधिकारियों ने टैक्स की दरों को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी। प्रतिमा कुमारी ने बताया कि कंपाउंडिंग ईंट भट्ठा व्यवसायियों को 6 प्रतिशत की दर से कर देना होगा, जबकि सामान्य संचालकों के लिए यह दर 12 प्रतिशत निर्धारित की गई है। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि किसी भी तरह की समस्या होने पर व्यवसायी सीधे उनसे संपर्क साध सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
अधिकारियों और व्यवसायियों के बीच समन्वय पर बल
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य कर संयुक्त आयुक्त–2 ज्ञानदीप प्रभाकर, राज्य कर उपायुक्त तरुण कुमार, वाणिज्य कर अंचल–1 एवं 2 के पदाधिकारी और खनन पदाधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में व्यवसायियों से सरकार को देय कर का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की अपील की।
ईंट भट्ठा व्यवसाय संघ के अध्यक्ष जयराम प्रसाद के साथ जिले के सैकड़ों व्यवसायी इस बैठक में शामिल हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बैठक का उद्देश्य विभाग और व्यवसायियों के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित करना था, ताकि कर संबंधी नियमों की स्पष्ट जानकारी देकर भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी परेशानी से बचा जा सके।



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