

Loan Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव का 9 करोड़ रुपये का लोन केस एक बार फिर सुर्खियों में है, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है। यह मामला न केवल एक सेलिब्रिटी के वित्तीय संघर्षों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में पैसों का प्रबंधन कभी-कभी अप्रत्याशित चुनौतियों को जन्म दे सकता है।
# राजपाल यादव का 9 करोड़ का Loan Case: दिल्ली हाई कोर्ट से मिली राहत, जानें पूरा मामला
## राजपाल यादव Loan Case की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा विवाद?
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को 9 करोड़ रुपये के लोन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। इससे पहले 12 फरवरी को अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन 16 फरवरी की सुनवाई में उन्हें बड़ी राहत मिली। शुक्रवार को वे अंतरिम जमानत पर रिहा हो गए। इस पूरे प्रकरण में व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें और खुल गई हैं।
माधव गोपाल अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी मुलाकात राजपाल यादव से सांसद मिथिलेश कुमार कथारिया के माध्यम से हुई थी। अग्रवाल के अनुसार, उस समय राजपाल यादव ने बताया था कि उनकी फिल्म ‘भूल भुलैया’ लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन यदि तुरंत पैसों का इंतजाम नहीं हुआ तो परियोजना प्रभावित हो जाएगी। इसके बाद, उन्होंने कहीं और से धन जुटाकर 5 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
माधव गोपाल अग्रवाल दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। आरोप है कि राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए इस कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म का अनुमानित बजट लगभग 11 करोड़ रुपये था। यह वित्तीय विवाद तब और गहरा गया जब चेक बाउंस होने की खबरें आईं।
## फिल्म की असफलता और वित्तीय संकट
हालांकि, 2012 में रिलीज होने के बाद ‘अता पता लापता’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही और मात्र लगभग 37 लाख रुपये की कमाई कर सकी। यहीं से वित्तीय विवाद की गंभीर शुरुआत हुई। अग्रवाल का आरोप है कि राजपाल यादव ने उनसे कर्ज लिया था और बाद में भुगतान के लिए दिया गया चेक बाउंस हो गया, जिससे कानूनी कार्यवाही शुरू हुई। दूसरी ओर, राजपाल यादव का दावा रहा है कि यह रकम निवेश के रूप में दी गई थी और व्यवसायी अपने पोते को फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में लॉन्च करना चाहते थे। यह दावा दर्शाता है कि यह एक जटिल वित्तीय विवाद है, जिसमें दोनों पक्षों के अलग-अलग तर्क हैं।
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फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और आगे की सुनवाई में ही यह तय होगा कि विवादित रकम कर्ज थी या निवेश। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मामला फिल्मी दुनिया में होने वाले बड़े वित्तीय लेनदेन और उनके संभावित परिणामों को भी रेखांकित करता है। ऐसे मामले अक्सर कानूनी दांव-पेच और सार्वजनिक बहस का विषय बन जाते हैं, जिससे न केवल संबंधित व्यक्तियों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री पर इसका असर दिख सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



