

Keoti News: दिन के उजाले में कुल्हाड़ी चली और सरकारी पेड़ ज़मींदोज़ हो गए, लेकिन दफ्तरों में बैठे साहबों को कानों-कान खबर तक नहीं लगी। केवटी प्रखंड मुख्यालय परिसर से बिना किसी अनुमति के करीब आधा दर्जन पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला मनरेगा भवन के ठीक पीछे का है, जहां खेत के पास लगे एक मोटे पुराने पेड़ समेत लगभग छह पेड़ों को काट दिया गया। मौके पर अब केवल पेड़ों के ठूंठ और बिखरी हुई लकड़ियां ही बची हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि यह कटाई कुछ दिन पहले ही की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर ट्रैक्टर पर लादकर ले जाया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Keoti News: BDO की नाक के नीचे कट गए पेड़
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी प्रखंड परिसर में मौजूद 50 साल पुराने एक सीरिष्ट के पेड़ को काट दिया गया था और वह मामला अभी तक सुलझा भी नहीं है। उस जांच का हश्र क्या हुआ, यह किसी को नहीं पता, और अब एक और बड़ी घटना हो गई है। इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मो. इकबाल अंसारी ने वन विभाग, डीएम और एसएसपी को आवेदन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी परिसर में इस तरह खुलेआम सरकारी पेड़ की कटाई एक गंभीर अपराध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए।
पुराने सीरिष्ट पेड़ की कटाई के मामले में वन विभाग ने जांच का आदेश तो दिया था, जिसकी जिम्मेदारी वनपाल काजल कुमारी को सौंपी गई थी। लेकिन आज तक उस जांच की रिपोर्ट बड़े अधिकारियों तक नहीं पहुंची है। इस सुस्ती के कारण ही अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस नए मामले ने एक बार फिर से विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या बोले प्रखंड विकास पदाधिकारी?
जब इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंद्र मोहन पासवान से सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद चौंकाने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, “पेड़ कब कटे, इसकी जानकारी आप लोगों को ही है, मुझे नहीं। मेरे सामने कोई पेड़ नहीं काटा गया है।” BDO का यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है कि आखिर उनकी नाक के नीचे इतना बड़ा खेल कैसे हो गया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी।
क्षेत्र के वन पदाधिकारी हेमकांत झा ने कहा है कि पुराने मामले की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जब एक जांच पूरी नहीं हुई, तो दूसरी घटना को कैसे रोका जाएगा? इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग प्रशासन से त्वरित और कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





