

Income Tax Rules: यदि आप उन लाखों सैलरीड प्रोफेशनल्स में से हैं जिन्हें अपनी कंपनी से कार की सुविधा मिलती है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकार के नए ड्राफ्ट आयकर नियमों के तहत, कंपनी द्वारा दी जाने वाली कार सुविधा अब आपकी जेब पर कुछ अतिरिक्त बोझ डालने वाली है। यह बदलाव आपके मासिक टैक्स बिल को सीधे प्रभावित करेगा, जिससे कंपनी कार का लाभ उठाना थोड़ा महंगा हो जाएगा।
कंपनी कार सुविधा पर नए Income Tax Rules: 15 लाख वेतन पर बढ़ेगा इतना बोझ
नए ड्राफ्ट आयकर नियम 2026 के अनुसार, उन कर्मचारियों को अपनी मासिक कर योग्य आय में वृद्धि देखने को मिलेगी जिन्हें कंपनी की ओर से वाहन सुविधा मिलती है। विशेष रूप से, 15 लाख रुपये के वार्षिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए, कंपनी की कार सुविधा के कारण उनके टैक्स बिल में 4,352 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। यह उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो अब तक इस सुविधा को एक बड़े लाभ के रूप में देखते आए हैं।
नए Income Tax Rules का कंपनी कार यूजर्स पर प्रभाव
इन बदलावों का उद्देश्य कंपनी द्वारा प्रदान की जाने वाली गैर-मौद्रिक सुविधाओं को अधिक पारदर्शी बनाना और उन पर उचित कर लगाना है। यह उन कर्मचारियों को प्रभावित करेगा जिनके नियोक्ता उन्हें पर्सनल यूज के लिए कार प्रदान करते हैं। अब इस सुविधा के मूल्यांकन की विधि में बदलाव किया गया है, जिसके कारण कर योग्य आय में वृद्धि हो रही है। इस नए प्रावधान के तहत, कंपनी द्वारा कार पर किए गए वास्तविक खर्च और कर्मचारी द्वारा उसके निजी उपयोग के अनुपात को अधिक बारीकी से देखा जाएगा। इस नए नियम के लागू होने के बाद, कई कर्मचारियों को अपने “टैक्स बर्डन” का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बदलाव कंपनियों की कर्मचारी लाभ नीतियों पर भी असर डाल सकता है।
सरकार का यह कदम राजस्व संग्रह को बढ़ाने और कर प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक प्रयास है। हालांकि, यह निश्चित रूप से उन कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है जो अपनी दैनिक आवागमन के लिए पूरी तरह से कंपनी द्वारा प्रदान की गई कार पर निर्भर हैं।
बढ़ते कर भार के बीच क्या करें कर्मचारी?
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये ड्राफ्ट नियम हैं और 2026 में लागू होने से पहले इनमें कुछ संशोधन हो सकते हैं। लेकिन अभी से तैयारी करना समझदारी होगी। कर्मचारियों को अपने वेतन ढांचे और कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता होगी। कंपनियों को भी अपनी पेरोल प्रक्रियाओं और फ्रिंज बेनिफिट वैल्यूएशन को नए नियमों के अनुसार अपडेट करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से कुछ कंपनियों को अपनी कार सुविधा नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। वे कर्मचारियों को कार खरीदने के लिए भत्ता देने या लीजिंग विकल्पों पर विचार कर सकती हैं जो कर्मचारी के लिए कम कर योग्य हों। यह भी संभव है कि कुछ कर्मचारी अब अपनी कंपनी की कार के बजाय व्यक्तिगत वाहन खरीदने या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने पर विचार करें, खासकर यदि ‘टैक्स बर्डन’ उनके लिए बहुत अधिक हो जाता है।
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यह ड्राफ्ट नियम भविष्य के लिए एक संकेत है कि सरकार विभिन्न कर्मचारी सुविधाओं पर कर लगाने के अपने प्रयासों को तेज कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसे में, हर सैलरीड व्यक्ति को आयकर कानूनों में होने वाले इन बदलावों पर पैनी नज़र रखनी चाहिए ताकि वे अपनी वित्तीय योजनाओं को उसी के अनुरूप ढाल सकें। यह कदम न केवल कर्मचारियों की जेब पर असर डालेगा बल्कि ऑटोमोबाइल बाजार में कुछ नए ट्रेंड्स को भी जन्म दे सकता है।





