

Ashok Choudhary: राजनीति के बिसात पर हर मोहरा एक नई चाल चलता है, लेकिन बिहार की सियासत में एक मंत्री ने ऐसी चाल चली है, जो आम से जुदा है। आमतौर पर लोग अकादमिक ऊंचाइयों को छूकर राजनीति में आते हैं, पर यहां एक कद्दावर मंत्री ने अपने पद पर रहते हुए शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा है।
Ashok Choudhary: एएन कॉलेज में नए सफर की शुरुआत
Ashok Choudhary: राजनीति में आमतौर पर लोग प्रोफेसर बनकर मंत्री पद तक पहुंचते हैं, लेकिन बिहार की सियासत में एक उलटफेर देखने को मिला है। राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने एएन कॉलेज, पटना में सहायक प्रोफेसर के तौर पर अपना योगदान देकर सबको चौंका दिया है। उनकी यह नई भूमिका राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ गई है।
चौधरी ने अपनी इस नई जिम्मेदारी को स्वीकार करने के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने अपने दिवंगत पिता और बिहार के दिग्गज नेता महावीर चौधरी को याद किया। उन्होंने लिखा, “लोग प्रोफेसर होकर मंत्री बनते हैं, मैं मंत्री होकर प्रोफेसर बना।” यह बात उनके पोस्ट का मुख्य अंश थी, जिसने कई लोगों का ध्यान खींचा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उनकी नियुक्ति इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर हुई है। इस कदम से यह साफ हो गया है कि वे राजनीति के साथ-साथ शिक्षा जगत में भी अपनी सेवाएं देंगे। यह घटना उन सभी धारणाओं को तोड़ती है, जिनमें माना जाता है कि राजनीति में आने के बाद लोग अन्य क्षेत्रों से दूर हो जाते हैं।
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पिता की विरासत और बेटे का सम्मान
मंत्री अशोक चौधरी ने अपनी पोस्ट में अपने पिता के संघर्ष और उनके आदर्शों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता ने हमेशा उन्हें शिक्षा और समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। एएन कॉलेज में योगदान देना उनके लिए केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि अपने पिता के सपनों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का एक जरिया है।
इस घटना के बाद से राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों क्षेत्रों में खूब चर्चा हो रही है। कई लोग उनके इस कदम को एक मिसाल के तौर पर देख रहे हैं, वहीं कुछ इसे एक नया ट्रेंड मान रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह एक अनूठा उदाहरण बन गया है, जहां एक मंत्री सक्रिय राजनीति के साथ-साथ अकादमिक भूमिका में भी सक्रिय रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






