

Child Labour: जिस उम्र में हाथों में कलम-किताब होनी चाहिए, उस उम्र में कुछ मासूमों के हाथ औजारों की कालिख से सने थे, लेकिन अब इन नन्हे हाथों को उनका हक वापस दिलाया जा रहा है।
मधुबनी में मासूमों के दुश्मनों पर एक्शन, Child Labour के खिलाफ Mega Raid में 3 बच्चे मुक्त, मालिकों पर FIR
Child Labour: मधुबनी में जिलाधिकारी आनंद शर्मा के निर्देश पर जिले में बाल श्रम के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है, जिसके तहत धावा दल ने कई जगहों पर छापेमारी कर बच्चों को इस दलदल से बाहर निकाला। श्रम अधीक्षक, दिनेश कुमार द्वारा गठित एक विशेष धावा दल ने मंगलवार को जिले के सभी अनुमंडलों में गहन छापेमारी अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न दुकानों और प्रतिष्ठानों में चल रही बाल मजदूरी को रोकना और बच्चों को मुक्त कराना था। टीम ने मधवापुर अनुमंडल में विशेष सफलता हासिल की।
Child Labour के खिलाफ जिले में बड़ी कार्रवाई
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मधवापुर सिद्धार्थ कुमार ने बताया कि छापेमारी के क्रम में मधवापुर से 03 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया है। इनमें राम जानकी चौक पर स्थित मोहम्मद सलाम की सर्विस और वर्कशॉप दुकान से एक, मधवापुर बस स्टैंड पर स्थित मोहम्मद मंजूर आलम के गैरेज से एक, और साहरघाट के बसबरिया चौक पर संजय साह की नाश्ते की दुकान से एक कार्यरत बाल श्रमिक को मुक्त कराया गया। इन सभी जगहों पर बच्चों से काम कराया जा रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बच्चों का होगा पुनर्वास, मिलेगी आर्थिक मदद
मुक्त कराए गए सभी बच्चों को तुरंत बाल कल्याण समिति, मधुबनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकारी प्रावधानों के तहत प्रत्येक बच्चे को 3,000 रुपये की तत्काल सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा, उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 25,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) भी कराई जाएगी। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बच्चों को उनका बकाया न्यूनतम मजदूरी का भुगतान भी मिले। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। साथ ही, इन बच्चों की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था करते हुए उन्हें स्कूल में नामांकित कराया जाएगा और उनके परिवारों को भी अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
दोषी मालिकों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बच्चों से काम कराना एक गंभीर अपराध है। इस मामले में दोषी पाए गए नियोजकों पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना और 2 साल तक की कैद हो सकती है। इतना ही नहीं, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक 20,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान करने के आरोप में उन पर 10 गुना मुआवजे के साथ संबंधित न्यायालय में दावा पत्र भी दायर किया जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
धावा दल में ये अधिकारी रहे शामिल
इस सफल छापेमारी अभियान में धावा दल की टीम में मधवापुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सिद्धार्थ कुमार, जयनगर के अश्विनी कुमार, पंडौल के अभिषेक कुमार, बेनीपट्टी की आकांक्षा कुमारी, चाइल्ड हेल्प लाइन से सोनी कुमारी, सर्वों प्रयास संस्था के प्रतिनिधि हरि प्रसाद और ग्राम विकास युवा ट्रस्ट के संतोष कुमार शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक मधुबनी जिले से 33 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जा चुका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बाल श्रमिकों के विमुक्ति हेतु यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।




