

Bihar Liquor Ban: बिहार की सियासी भट्टी में शराबबंदी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। इस बार चिंगारी कांग्रेस के एक विधायक ने सुलगाई है, जिसकी तपिश से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
कांग्रेस विधायक ने उठाई Bihar Liquor Ban की समीक्षा की मांग
बिहार की राजनीति में शराबबंदी कानून पर बहस कोई नई बात नहीं है, लेकिन कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन के हालिया बयान ने इस मुद्दे को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है। उन्होंने न केवल इस सख्त कानून की समीक्षा की पुरजोर मांग की है, बल्कि इसके साथ ही विधानसभा के सभी सदस्यों का ब्लड टेस्ट कराने की मांग करके सबको चौंका दिया है। विधायक रंजन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर पहले से ही सरकार पर दबाव बना हुआ है। इस मांग ने सियासी गलियारों में खूब हलचल मचा दी है, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। अभिषेक रंजन का यह कदम निश्चित तौर पर बिहार की राजनीति में एक बड़े विवाद को जन्म दे रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विधायक के इस विस्फोटक बयान ने सीधे तौर पर शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता और इसे लागू करने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि अगर कानून इतना प्रभावी है, तो फिर खुलेआम शराब की तस्करी और बिक्री कैसे हो रही है? ब्लड टेस्ट की मांग के पीछे उनका निहितार्थ साफ है कि वे यह जानना चाहते हैं कि क्या वास्तव में जनप्रतिनिधि स्वयं इस कानून का पालन कर रहे हैं। इस बयान के बाद, कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी शराबबंदी समीक्षा की मांग में अपनी आवाज मिलाई है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।
सियासी बवाल और बयानबाजी का दौर
अभिषेक रंजन के बयान के बाद बिहार की राजनीति में बवाल मच गया है। विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इस आरोप का खंडन करने में जुटा है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बिहार में शराबबंदी पर इतनी तीखी बहस छिड़ी हो। पिछले कुछ वर्षों में जहरीली शराब की घटनाओं और इसके कथित असफल क्रियान्वयन को लेकर सरकार पर लगातार उंगलियां उठती रही हैं। अब जब एक विधायक ने सीधे तौर पर ब्लड टेस्ट जैसी मांग उठाई है, तो इस बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले पर सरकार को अब ठोस प्रतिक्रिया देनी होगी और शायद शराबबंदी की नीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत और कानूनी पहलू दोनों की गहराई से जाँच होनी चाहिए। जहरीली शराब से होने वाली मौतों की संख्या को देखते हुए, यह बहस अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक सरोकार का विषय बन गई है। इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए कि क्या यह कानून अपने मूल उद्देश्यों को पूरा कर रहा है या फिर इसके उलट इसने एक समानांतर अवैध शराब अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस विधायक की इस मांग पर विधानसभा में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या सरकार वास्तव में शराबबंदी की व्यापक समीक्षा के लिए तैयार होती है। इस विवाद का असर आने वाले समय में बिहार की राजनीति पर गहरा पड़ सकता है।


