

Agni Panchak: पवित्र हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में पांच दिन ऐसे आते हैं, जिन्हें पंचक कहा जाता है। इन दिनों में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन्हें ज्योतिष शास्त्र में अशुभ माना जाता है। खासकर जब ये पंचक अग्नि तत्व से संबंधित हों, तो इनकी गंभीरता और बढ़ जाती है। आइए, जानते हैं कि साल 2026 के अग्नि पंचक के दौरान किन कार्यों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
# अग्नि पंचक 2026: जानिए क्या हैं निषेध और उपाय
पंचक, ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्रमा के धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण और शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती नक्षत्र में गोचर के दौरान पड़ने वाले पांच दिनों के समूह को कहा जाता है। यह अवधि शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती है। इन पंचकों में से कुछ विशिष्ट पंचक होते हैं, जिनका नाम उनके आरंभ होने वाले दिन के आधार पर रखा जाता है, जैसे रविवार को शुरू होने वाला ‘रोग पंचक’ और मंगलवार को शुरू होने वाला ‘अग्नि पंचक’। जब पंचक मंगलवार से शुरू होता है, तो इसे अग्नि पंचक कहा जाता है, जो अग्नि से संबंधित अशुभ प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। इस दौरान अग्नि, बिजली और आग लगने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
## अग्नि पंचक में वर्जित कार्य
वर्ष 2026 में जब अग्नि पंचक की अवधि आती है, तो सनातन धर्म और ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। इन कार्यों को करने से हानि, बाधा और कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।
* **गृह निर्माण एवं गृह प्रवेश:** अग्नि पंचक के दौरान किसी भी नए घर का निर्माण शुरू करना या बने हुए घर में गृह प्रवेश करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कलह और अशांति का वास हो सकता है।
* **लकड़ी या ईंधन का संग्रह:** इस अवधि में लकड़ी, ईंधन या जलने वाली कोई भी वस्तु खरीदना या इकट्ठा करना वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इससे अग्नि दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
* **दक्षिण दिशा की यात्रा:** अग्नि पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा करना अशुभ माना जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा यम की दिशा है। इस दौरान यात्रा करने से दुर्घटना या अप्रत्याशित बाधाएं आ सकती हैं।
* **शव का अंतिम संस्कार:** यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु अग्नि पंचक के दौरान होती है, तो ज्योतिषीय विधान के अनुसार, मृतक के साथ आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर उनका दाह संस्कार किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे पंचक के अशुभ प्रभाव से परिवार के अन्य सदस्यों की रक्षा होती है।
* **विवाह और अन्य मांगलिक कार्य:** अग्नि पंचक को विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए भी अशुभ माना जाता है। इन दिनों में किए गए शुभ कार्यों का फल नकारात्मक हो सकता है।
* **नया पलंग या चारपाई खरीदना:** अग्नि पंचक की अवधि में नया पलंग या चारपाई खरीदना भी निषेध माना गया है। इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
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### अग्नि पंचक के प्रभाव से बचने के उपाय
हालांकि अग्नि पंचक को अशुभ माना जाता है, लेकिन कुछ उपायों को अपनाकर इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* **महामृत्युंजय मंत्र का जाप:** अग्नि पंचक के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत लाभकारी माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को शांत करता है और सुरक्षा प्रदान करता है।
* **यज्ञ और हवन:** घर में लघु यज्ञ या हवन करवाना शुभ होता है। अग्नि को शुद्ध करने वाले मंत्रों के साथ हवन करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
* **दान-पुण्य:** इस अवधि में दान-पुण्य करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* **यमराज की पूजा:** यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हुई हो, तो यमराज की विधिवत पूजा और पंचक शांति पूजा करवाना आवश्यक है, जिससे परिवार पर आने वाले संकटों को टाला जा सके।
यह महत्वपूर्ण है कि हम धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय सिद्धांतों का सम्मान करें और अग्नि पंचक जैसी अवधियों के दौरान बताई गई सावधानियों का पालन करें। इससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।


