

ANM recruitment in Bihar: बिहार के स्वास्थ्य महकमे की मुरझाई डाल पर बहार आने वाली है, सरकार ने नौकरियों का ऐसा पिटारा खोला है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदलनी तय है।
44 हजार पदों पर ANM recruitment in Bihar की प्रक्रिया शुरू
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। विधानसभा के उच्च सदन में स्वास्थ्य विभाग के बजट पर चर्चा के बाद सरकार ने यह घोषणा की कि वर्ष 2026 तक 44 हजार से अधिक एएनएम (ANM) की नियुक्ति की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सदन को सूचित किया कि अगले एक वर्ष के भीतर कुल 44,321 पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंत्री ने बहाली का ब्योरा देते हुए बताया कि इन नियुक्तियों में 5,006 एएनएम की बहाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत होगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 7,468 एएनएम की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कर्मचारियों की कमी को पूरी तरह से दूर करना है। यह वृहत ANM recruitment in Bihar अभियान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
स्वास्थ्य बजट को मिली मंजूरी, निजी प्रैक्टिस पर बनेगी नीति
विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270.41 करोड़ रुपये का बजट भारी बहुमत से स्वीकृत किया गया। सरकार के अनुसार, इस बजट का उपयोग स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के विकास, मानव संसाधन की बहाली और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाएगा। मंगल पांडेय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए एक ठोस नीति तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, निजी प्रतिष्ठित संस्थानों को राज्य में अस्पताल स्थापित करने के लिए एक प्रोत्साहन नीति पर भी काम चल रहा है ताकि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर काम कर सकें।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं और भी बेहतर होंगी और आम लोगों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और योजनाओं का असर
सरकार ने दावा किया है कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार के स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। राज्य में शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति एक हजार जीवित जन्मों पर 23 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है। इसी तरह, मातृ मृत्यु दर 334 से घटकर 104 पर आ गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कुल प्रजनन दर का 4.2 से घटकर 2.8 पर आना भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इन सुधारों के पीछे कई योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
- राज्य में संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गई है।
- पिछले 16 महीनों से बिहार मुफ्त दवा वितरण के मामले में देश में पहले स्थान पर है, जिससे गरीबों को बड़ी राहत मिली है।
- कालाजार, यक्ष्मा (टीबी) और चमकी बुखार जैसी गंभीर बीमारियों के उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं।
- सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियों का टीकाकरण भी किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में भी 935 पदों पर होगी बहाली
स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ-साथ शिक्षा विभाग को लेकर भी सदन में अहम जानकारी दी गई। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि स्कूलों की निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक 10 पंचायतों पर एक सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए कुल 935 पदों का सृजन किया गया है, जिन पर बहाली के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) जल्द ही विज्ञापन प्रकाशित करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



