

Purnia News: सियासी अखाड़े में अक्सर उठापटक लगी रहती है, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जिनकी गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बन जाती है। जेल की सलाखों से बाहर आते ही एक बार फिर पूर्णिया के शेर ने हुंकार भरी है, जिसने न सिर्फ अपने समर्थकों को ऊर्जा दी बल्कि सियासी गलियारों में भी हलचल मचा दी।
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की जेल से रिहाई के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र में वापसी एक ऐतिहासिक पल बन गई। पूर्णिया हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे समर्थकों ने फूलों की बारिश कर अपने प्रिय नेता का भव्य अभिनंदन किया। पूरा इलाका “पप्पू यादव जिंदाबाद” के नारों से गूँज उठा, जो उनकी लोकप्रियता और क्षेत्र में उनके प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण था। इस दौरान आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पूर्णिया न्यूज़: माफिया राज पर पप्पू यादव का सीधा हमला
इस भव्य स्वागत के बीच, पप्पू यादव ने एक बड़ा और बेबाक बयान दिया, जिसने सीमांचल की राजनीति में गर्माहट ला दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि सीमांचल की जनता का उन्हें समर्थन न मिलता, तो कोचिंग माफिया, नर्सिंग होम माफिया और कुछ सियासी हस्तियां मिलकर उन्हें कभी भी शांत करा सकती थीं।उन्होंने दावा किया कि 7 करोड़ रुपये की सुपारी उनकी हत्या के लिए दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें बचा लिया। उनके इस बयान ने क्षेत्र में चल रहे अवैध धंधों और उनसे जुड़े प्रभावशाली लोगों पर सीधे तौर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह आरोप एक बार फिर से क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार और अपराधिक गतिविधियों को उजागर करता है, जिस पर Bihar Politics में अक्सर बहस होती रही है।
सांसद पप्पू यादव ने अपने संबोधन में जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी ढाल बताया। उन्होंने कहा कि जनता का प्यार और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यह दर्शाता है कि वे अपने संसदीय क्षेत्र की जनता के साथ कितना गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं और उनकी आवाज बनने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। उनकी बातों से स्पष्ट था कि वे भविष्य में भी जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
जनता का अटूट विश्वास और भविष्य की चुनौतियां
पप्पू यादव ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि उनकी लड़ाई उन ताकतों के खिलाफ है जो गरीबों और शोषितों का हक मारते हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि वे पूर्णिया और पूरे सीमांचल को इन माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराकर एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य का निर्माण करेंगे। उनकी रिहाई और यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और हर नेता अपनी जगह बनाने की कोशिश में जुटा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पप्पू यादव के समर्थकों में नया जोश भर दिया है, बल्कि विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। उनकी वापसी को सीमांचल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




