

Bihar Politics: बिहार की सियासत में आजकल पारा चढ़ा हुआ है, और जब बात विधान परिषद तक पहुंचे तो समझिए कि मामला गर्मा चुका है। इसी गरमाहट का नतीजा है, विधान परिषद में दो कद्दावर नेताओं के बीच तीखी भिड़ंत, जिसने सदन का माहौल पूरी तरह बदल दिया।
Bihar Politics: क्यों हुई विधान परिषद में यह तीखी बहस?
यह पूरा मामला बिहार विधान परिषद के भीतर तब शुरू हुआ जब राजद के MLC सुनील सिंह ने सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी की डिग्री यानि शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाए। आरोपों का तीर ऐसा चला कि सदन में तनाव का माहौल बन गया। सुनील सिंह ने सीधे तौर पर चौधरी की डिग्री को लेकर प्रश्नचिह्न लगाया, जिसके बाद अशोक चौधरी भी अपनी सीट से उठ खड़े हुए और उन्होंने सुनील सिंह को खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि यदि उनकी डिग्री नकली साबित हो जाती है, तो वे तुरंत इस्तीफा दे देंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चौधरी ने पलटवार करते हुए सुनील सिंह से कहा कि वह उनकी डिग्री को फर्जी साबित करके दिखाएं, अन्यथा खुद इस्तीफा दें। इस आरोप-प्रत्यारोप ने सदन की कार्यवाही को बाधित कर दिया और अन्य सदस्यों को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का सबूत है कि राजनीतिक मर्यादाएं अक्सर तार-तार होती दिखती हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दोनों नेताओं के बीच यह व्यक्तिगत टकराव जल्द ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया, जिसने पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय ले लिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सदन की मर्यादा और राजनीतिक शुचिता का सवाल
सदन में इस तरह की बहसें कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन जब बात किसी नेता की शैक्षणिक योग्यता पर आ जाए और फिर इस्तीफे तक की चुनौती दी जाए, तो यह निश्चित रूप से गंभीर हो जाती है। राजनीतिक गलियारों में इस घटना पर खूब चर्चा हो रही है। कुछ लोग इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बता रहे हैं, तो कुछ इसे नेताओं की बढ़ती असहिष्णुता का परिणाम। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सुनील सिंह के आरोपों के बाद अब सबकी निगाहें अशोक चौधरी पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या अगला कदम उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार की राजनीति में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का स्तर लगातार गिर रहा है। इस पूरी घटना ने सदन के भीतर और बाहर भी राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है।




