

Mohammed Shami: भारतीय क्रिकेट के चमकते सितारे मोहम्मद शमी के जीवन में एक बार फिर कानूनी दांव-पेेंच का साया मंडरा गया है। घरेलू हिंसा के एक पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टीम इंडिया के इस दिग्गज गेंदबाज को नोटिस जारी कर पत्नी हसीन जहां की अर्जी पर जवाब मांगा है, जिससे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है।
Mohammed Shami: घरेलू हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शमी को भेजा नोटिस, पत्नी हसीन जहां की याचिका पर मांगा जवाब
यह खबर शमी के उन फैंस के लिए चिंता का विषय है जो उन्हें मैदान पर अपनी गति और स्विंग से बल्लेबाजों को परेशान करते देखना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम मोहम्मद शमी के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है, जिससे उनकी निजी जिंदगी एक बार फिर सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Mohammed Shami पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या है पूरा मामला?
मामला 2018 का है जब शमी की पत्नी हसीन जहां ने उन पर घरेलू हिंसा और बेवफाई के गंभीर आरोप लगाए थे। तब से यह मामला विभिन्न अदालतों में चल रहा है। हसीन जहां ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने शमी को यह नोटिस जारी किया है।
हसीन जहां की याचिका में क्या है? उनकी अर्जी में शमी पर आईपीसी की धारा 498ए (पति या रिश्तेदार द्वारा महिला के प्रति क्रूरता) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई है। इस याचिका में शमी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग भी शामिल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया था और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के उन आदेशों पर संज्ञान लिया है, जिसमें शमी को गिरफ्तारी से संरक्षण मिला हुआ था। अब उन्हें इस ताजा नोटिस पर अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला न केवल शमी के करियर पर, बल्कि उनकी छवि पर भी सीधा असर डाल सकता है। इस पूरे घटनाक्रम पर फैंस और क्रिकेट पंडित अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। कुछ का मानना है कि यह शमी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है, जबकि अन्य इसे उनकी निजी जिंदगी का मामला बता रहे हैं।
कानूनी लड़ाई और शमी का भविष्य
मोहम्मद शमी फिलहाल भारतीय टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं और उन्होंने हाल के समय में शानदार प्रदर्शन किया है। ऐसे में इस कानूनी नोटिस का उन पर मानसिक रूप से दबाव पड़ना स्वाभाविक है। उन्हें अब अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करनी होगी, जबकि मैदान पर भी उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना होगा।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी और क्या मोड़ लेगी, यह देखना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि मोहम्मद शमी के लिए यह दौर आसान नहीं होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटना फिर से दिखाती है कि कैसे एक खिलाड़ी की निजी जिंदगी की चुनौतियाँ उसके पेशेवर जीवन को भी प्रभावित कर सकती हैं।
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