

Bihar Liquor Ban Review: सियासत की गलियों में एक बार फिर सुरा पर बहस छिड़ गई है, जहां वोटों का गणित और जनमानस की राय, दोनों ही दांव पर हैं। बिहार में शराबबंदी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
Bihar Liquor Ban Review: बिहार में शराबबंदी पर क्यों गरमाई सियासत? मांझी के बयान से हिला पूरा प्रदेश!
Bihar Liquor Ban Review: क्या समीक्षा की ज़रूरत है?
Bihar Liquor Ban Review: बिहार की राजनीति में दशकों से ‘शराबबंदी’ एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, जिसने कई सरकारों के भाग्य तय किए हैं। मौजूदा समय में भी यह कानून राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है। हाल ही में, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के विधायक माधव आनंद ने विधानसभा में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाकर एक नई बहस को जन्म दिया है। उनकी इस मांग के तुरंत बाद, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बयान सामने आया, जिसने इस पूरे प्रकरण को और गरमा दिया है और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मांझी ने अपने बयान में शराबबंदी कानून के कार्यान्वयन और इसके प्रभावों पर सवाल उठाए हैं, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी एक अजीब सी स्थिति पैदा हो गई है। उनके बयान को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक ओर जहां कुछ नेता इसे समय की मांग बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ इसे सरकार की नीति से खिलवाड़ मान रहे हैं। हालांकि, इस पर गहन मंथन जारी है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मांझी का बयान और राजनीतिक समीकरण
जितन राम मांझी का बयान महज एक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह बिहार में शराबबंदी कानून के भविष्य को लेकर गहरे सवाल खड़े करता है। मांझी ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि इस कानून के कारण गरीबों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और इसके सफल क्रियान्वयन में भी कई खामियां हैं। उनके इस रुख से बीजेपी के सहयोगी दल भी असमंजस में हैं, क्योंकि बीजेपी ने हमेशा शराबबंदी का समर्थन किया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस नई चुनौती से कैसे निपटती है। क्या वह समीक्षा की मांग पर विचार करेगी, या अपने कड़े रुख पर कायम रहेगी? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए शराबबंदी कानून पर कोई भी बड़ा फैसला राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मुद्दे पर सरकार का अगला कदम बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।




