

UP Politics: राजनीति का अखाड़ा, जहां हर दांव और हर चाल का अपना मोल होता है। ऐसे ही एक अहम पड़ाव पर, जब सूबे की सियासी तपिश चरम पर है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के बीच लखनऊ में हुई मुलाकात ने कई अटकलों को जन्म दिया है।
UP Politics: मुख्यमंत्री योगी और मोहन भागवत की अहम मुलाकात, 2027 चुनाव की रणनीति या सियासी मंथन?
UP Politics: बंद कमरों में क्या पक रही खिचड़ी?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच लखनऊ में 40 मिनट की एक गोपनीय बैठक हुई। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई इस मुलाकात का एजेंडा भले ही गुप्त रखा गया हो, लेकिन विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सरसंघचालक का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले, संघ के शताब्दी समारोह के तहत भागवत मथुरा और गोरखपुर में भी सक्रिय रहे थे।
मोहन भागवत के लखनऊ दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू आबादी में गिरावट, धर्मांतरण और हिंदू एकता के आह्वान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात की। संघ प्रमुख का यह दौरा इन्हीं संदेशों के साथ समाप्त हुआ, जो आगामी चुनावों के मद्देनजर संघ की दिशा को भी इंगित करता है।
चुनावी समीकरण और संघ की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत के बीच बातचीत मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी के पीडीए (PDA) फॉर्मूलेशन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के विनियमों पर देशव्यापी विवाद के इर्द-गिर्द घूमती रही। ऐसी अटकलें हैं कि मुख्यमंत्री ने संघ प्रमुख को यूजीसी विनियमों और 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी पर इसके संभावित प्रभावों के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की होगी, यदि इन विनियमों का उचित समाधान नहीं किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए इन नए यूजीसी नियमों पर रोक लगा दी थी, जिससे सरकार के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि इस अहम संघ की बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि चुनावी रणनीति, संगठनात्मक ढांचे को और प्रभावी बनाने तथा सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।
उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर 2024 के आम चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में आई गिरावट के बाद। इसलिए, अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में इस मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में बेहद खास माना गया। यह मुलाकात केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस बात की संभावना अब तेज हो गई है कि आने वाले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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हिंदू एकता और मुख्यमंत्री के भाषण
भागवत द्वारा लगातार हिंदू एकता पर जोर दिए जाने के मद्देनजर इस बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री के हालिया भाषणों के सुर से मेल खाता है जिनमें उन्होंने प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए अभियान’ का जिक्र किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मोहन भागवत जनवरी में 10 दिन के दौरे पर मथुरा गए थे। इसी महीने वह फिर उत्तर प्रदेश आए और अपने कार्यक्रम की शुरुआत गोरखपुर के तीन दिवसीय दौरे से की, जिसके बाद वह लखनऊ पहुंचे। संघ इसे अपने शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियान का हिस्सा बता रहा है, जबकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन बैठकों का गहरा राजनीतिक महत्व भी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



