

Ramadan 2026: रहमतों और बरकतों का यह पवित्र महीना, जब अल्लाह की खास इनायत बंदों पर बरसती है, चांद दिखाई देने के साथ ही शुरू हो गया है। मस्जिदों में इबादत की रौनक बढ़ गई है और हर तरफ एक पाक माहौल बन गया है। इस दौरान रोजा, तरावीह और सदका-खैरात का सिलसिला आरंभ हो जाता है, जो हर मुसलमान के लिए आत्मशुद्धि और अल्लाह के करीब होने का एक अनमोल अवसर है। यह महीना हमें संयम, त्याग और दूसरों के प्रति हमदर्दी का पाठ पढ़ाता है।
Ramadan 2026: चांद दिखने के साथ शुरू हुआ बरकतों का महीना
Ramadan 2026 की पवित्रता और महत्व
इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजान, पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण होता है। इसे रहमतों, बरकतों और मगफिरत का महीना कहा जाता है। इस पूरे महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक अन्न और जल का त्याग कर रोजा रखते हैं, जिसका उद्देश्य अल्लाह के प्रति अपनी आस्था और समर्पण को मजबूत करना है। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने, बुरे विचारों और कामों से बचने तथा मन को पवित्र करने की एक आध्यात्मिक साधना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रमजान के महीने में हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए मुसलमान इस दौरान कुरान पढ़ने, नमाज अदा करने और दुआएं मांगने में अधिक समय बिताते हैं। इस पवित्र अवधि में, दान-पुण्य और गरीबों की मदद करने का भी विशेष महत्व है। जकात और फितरा अदा करके जरूरतमंदों का ख्याल रखा जाता है, जिससे समाज में भाईचारा और समानता की भावना मजबूत होती है।
इस्लामी कैलेंडर में रमजान का स्थान
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जो हिजरी कैलेंडर पर आधारित होता है। यह चंद्रमा के दर्शन पर निर्भर करता है, इसलिए हर साल इसकी शुरुआत की तारीख बदलती रहती है। रमजान की शुरुआत चांद रात से होती है, जब नया चांद दिखाई देता है। इस रात को इबादत और दुआओं में बिताया जाता है और अगले दिन से रोजा रखने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
रमजान के दौरान मुख्य इबादतें
रमजान के महीने में कुछ खास इबादतों पर जोर दिया जाता है, जो इस प्रकार हैं:
* **रोजा रखना:** सूर्योदय से पहले सहरी करना और सूर्यास्त के बाद इफ्तार करना, इस बीच अन्न-जल का त्याग करना। यह अल्लाह के आदेश का पालन और आत्मशुद्धि का मार्ग है।
* **तरावीह की नमाज:** ईशा की नमाज के बाद विशेष तरावीह की नमाज अदा की जाती है, जिसमें कुरान का एक हिस्सा रोज पढ़ा जाता है, ताकि महीने के अंत तक पूरा कुरान मुकम्मल हो सके।
* **कुरान की तिलावत:** इस महीने में कुरान-ए-पाक की तिलावत (पाठ) का विशेष महत्व है। मुसलमान ज्यादा से ज्यादा कुरान पढ़ते और सुनते हैं।
* **जकात और सदका:** अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना, जिसे जकात कहा जाता है। फितरा भी रमजान के अंत में अदा किया जाता है।
* **शब-ए-कद्र:** रमजान के आखिरी दस दिनों में से एक विषम रात को शब-ए-कद्र माना जाता है, जो हजार महीनों से बेहतर है। इस रात में इबादत करने का सवाब बहुत ज्यादा होता है।
चांद रात, जिसे ईद का चांद देखने की रात भी कहते हैं, वह खुशी और जश्न का मौका होती है। इस रात को लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं और ईद की तैयारी करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह महीना हमें त्याग, समर्पण और खुदा के करीब जाने का अवसर देता है।
**निष्कर्ष और उपाय**
रमजान का महीना आत्म-निरीक्षण, पश्चाताप और अल्लाह से माफी मांगने का सुनहरा मौका है। इस दौरान अधिक से अधिक दुआएं मांगें, कुरान पढ़ें, गरीबों की मदद करें और अपने आचरण को शुद्ध रखें। यह महीना हमें संयम और धैर्य का पाठ पढ़ाता है, जिससे हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। यह माह हमें ईश्वर के प्रति कृतज्ञता और अपने साथियों के प्रति दया का भाव सिखाता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/



