

Bihar AI: कल तक जो राज्य अपनी पिछड़ी छवि से जूझ रहा था, आज वही तकनीक की दुनिया में लंबी छलांग लगाने को तैयार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहा है। हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एंड एक्सपो’ के प्रतिष्ठित मंच से बिहार ने यह ऐलान किया कि वह भविष्य की तकनीक का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
क्या है Bihar AI का पूरा प्लान?
इस समिट के दौरान बिहार सरकार ने भविष्य की नींव रखते हुए कुल 468 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह कोई मामूली निवेश नहीं है, बल्कि यह राज्य को पूर्वी भारत का तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में एक सोचा-समझा कदम है। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना को एक विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र में बदलने पर खर्च किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
समझौते के तहत प्रमुख परियोजनाएं इस प्रकार हैं:
- आईआईटी पटना में 250 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक रिसर्च पार्क की स्थापना की जाएगी।
- इसके अलावा, 60 करोड़ रुपये के निवेश से एक ‘एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ भी स्थापित होगा।
इन पहलों का सीधा असर राज्य के युवाओं पर पड़ेगा। सरकार का अनुमान है कि इस निवेश से 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, लगभग 50,000 युवाओं को एआई-आधारित अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य के जॉब मार्केट के लिए तैयार हो सकेंगे।
पूर्वी भारत का नया टेक हब बनेगा बिहार
बिहार सरकार की यह पहल केवल एआई तक सीमित नहीं है। राज्य ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘जीसीसी पॉलिसी 2026’ और ‘सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2026’ के साथ पहले ही निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। अब एआई में इस बड़े निवेश से बिहार पूर्वी भारत के एक उभरते हुए टेक हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां इनोवेशन, रिसर्च और उद्यमिता को बढ़ावा मिले।
यह कदम राज्य में तकनीकी शिक्षा के स्तर को भी बेहतर बनाएगा और पलायन की समस्या को कम करने में मदद करेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। जब स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और मौके मिलेंगे, तो वे अपने ही राज्य के विकास में योगदान देना चाहेंगे। यह निवेश बिहार के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है।


