

Mithila Lok Utsav: मिथिला की धरती एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत की धुन पर झूमने को तैयार है, क्योंकि तारीखों का ऐलान हो गया है और मंच सजने लगा है। दरभंगा में होने वाले इस भव्य आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है और रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस महोत्सव के आयोजन से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।
Mithila Lok Utsav में क्या-क्या होगा खास?
दरभंगा के जिलाधिकारी श्री कौशल कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि दो दिवसीय मिथिला लोक उत्सव का आयोजन 28 फरवरी एवं 01 मार्च 2026 को किया जाएगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मिथिला की समृद्ध लोक परंपरा, कला और संस्कृति को एक भव्य मंच प्रदान करना है। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, स्थल चयन और अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह आयोजन हर साल की तरह इस बार भी यादगार बने।
कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग स्थल निर्धारित किए गए हैं। सभी मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम दरभंगा ऑडिटोरियम में आयोजित होंगे, जहाँ दर्शक लोक नृत्य, लोक गायन, हास्य प्रस्तुतियों, हिंदी और मैथिली गायन, नाटक एवं लोक गाथा का आनंद ले सकेंगे। वहीं, नेहरू स्टेडियम और पोलो मैदान में खेलकूद एवं अन्य गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों में नौकायन और कबड्डी जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं, जो क्रमशः हराही पोखर और पोलो मैदान में होंगी। इस महोत्सव में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बैठक के दौरान विशेष रूप से यह निर्देश दिया कि उत्सव में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाए। इसका उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को एक बड़ा मंच और नई पहचान दिलाना है। इसी कड़ी में पारंपरिक मिथिला चित्रकला को प्रोत्साहन देने के लिए एक विशेष पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। यह प्रतियोगिता ऑडिटोरियम, पोलो मैदान और समाहरणालय की दीवारों पर आयोजित होगी, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को आकर्षक पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उत्सव के दौरान कला और साहित्य को भी बराबर का सम्मान दिया जाएगा। एक सर्व भाषा कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें विभिन्न भाषाओं के कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। इसके अलावा, विभिन्न विधाओं के उन उत्कृष्ट कलाकारों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने मिथिला की कला-संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विभिन्न विभागों के लगेंगे आकर्षक स्टॉल
पोलो मैदान में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा आकर्षक और उपयोगी स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जो उत्सव में आने वाले लोगों के लिए जानकारी और मनोरंजन का केंद्र बनेंगे। इन स्टॉलों में आजीविका नगर निगम, कृषि विभाग, आईसीडीएस, जीविका, वन विभाग, मत्स्य विभाग, स्वास्थ्य विभाग, और उद्योग विभाग समेत कई अन्य विभाग शामिल होंगे। मखाना अनुसंधान केंद्र और बैंकिंग क्षेत्र की भी भागीदारी होगी। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी तैयारियों को समय पर, समन्वित और प्रभावी ढंग से पूरा करें ताकि यह उत्सव भव्य और सुव्यवस्थित बन सके। बैठक में अपर समाहर्ता राजेश कुमार, उप निदेशक जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद और जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार समेत कई अन्य अधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।



