

Ramadan Sehri-Iftar Timing 2026: पवित्र माह रमजान की शुरुआत के साथ ही पटना सहित पूरे विश्व में इबादत और रूहानियत का एक अनुपम माहौल बन जाता है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे अकीदत और एहतराम के साथ रोजा रखकर अल्लाह की रज़ा हासिल करने की कोशिश करते हैं।
रमजान सेहरी-इफ्तार टाइमिंग 2026: माहे रमज़ान में पटना का संपूर्ण आध्यात्मिक कैलेंडर
रमजान सेहरी-इफ्तार टाइमिंग 2026: एक पवित्र यात्रा का आरंभ
Ramadan Sehri-Iftar Timing 2026: रमजान का पाक महीना इस्लाम धर्म में बहुत महत्व रखता है। यह संयम, दान और अल्लाह की इबादत का महीना है। पटना में भी इस पवित्र माह की शुरुआत के साथ ही एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण छा जाता है। रोजेदारों ने सहरी के बाद दिनभर भूखे-प्यासे रहकर सब्र और परहेजगारी का पैगाम दिया, जो इस पवित्र माहे रमज़ान की सबसे बड़ी विशेषता है। यह महीना हमें अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखने और दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने की प्रेरणा देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां हम आपके लिए 19 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक के रमजान सेहरी और इफ्तार के अनुमानित समय लेकर आए हैं, ताकि आप अपनी इबादत को सही ढंग से पूरा कर सकें। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
रमजान का महत्व और रोजा रखने के नियम
सेहरी और इफ्तार की फजीलत
- **रोजे की नियत:** रोजा शुरू करने से पहले सुबह सहरी के वक्त रोजा रखने की नियत (इरादा) करना अनिवार्य है।
- **सहरी का समय:** सहरी का समय समाप्त होने से कुछ मिनट पहले भोजन और पानी ग्रहण करना बंद कर दें। सहरी में बरकत होती है, इसलिए इसे छोड़ना नहीं चाहिए।
- **इफ्तार का समय:** सूरज डूबते ही बिना देर किए इफ्तार करना सुन्नत है। खजूर से इफ्तार करना उत्तम माना गया है।
- **दुआओं का महत्व:** इफ्तार के समय और पूरे दिन अल्लाह से खूब दुआएं मांगें, क्योंकि इस वक्त दुआएं कबूल होती हैं।
**पटना के लिए रमजान 2026: सेहरी और इफ्तार का अनुमानित समय**
| दिनांक | सहरी का समय | इफ्तार का समय |
| :———– | :———- | :———- |
| 19 फरवरी 2026 | 05:08 AM | 06:05 PM |
| 26 फरवरी 2026 | 05:01 AM | 06:10 PM |
| 05 मार्च 2026 | 04:54 AM | 06:15 PM |
| 12 मार्च 2026 | 04:47 AM | 06:20 PM |
| 20 मार्च 2026 | 04:39 AM | 06:26 PM |
*यह समय अनुमानित है और चांद दिखने या स्थानीय गणनाओं के आधार पर थोड़ा भिन्न हो सकता है।*
रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि यह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण, गलत कामों से बचने और अल्लाह के करीब आने का एक प्रशिक्षण शिविर है। इस महीने में नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। रोजेदार तरावीह की नमाज़ अदा करते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और ज़कात व सदका देकर गरीबों की मदद करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जो आपको ऐसे पवित्र अवसरों पर सही जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु व बि-का आमन्तु व अलयका तवक्कलतु व ‘अला रिज़क़िका अफ्तरतु।
(ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए रिज्क से इफ्तार किया।)
माहे रमज़ान का महीना खुदा की रहमतों, बरकतों और मगफिरत का महीना है। यह हमें अल्लाह की इबादत में लीन होने और अपने गुनाहों की माफी मांगने का सुनहरा मौका देता है। इस पाक महीने में अधिक से अधिक इबादत करें, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें, और अपने अखलाक (नैतिकता) को बेहतर बनाने का प्रयास करें। रोजा रखकर अल्लाह के फरमानों का पालन करने से आत्मशुद्धि होती है और रूहानी सुकून मिलता है। रमजान की ये पाबंदियां हमें साल भर नेक राह पर चलने की प्रेरणा देती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अल्लाह हम सब की इबादतों को कुबूल फरमाए। आमीन।



