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फ़रवरी, 19, 2026
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बिहार में बवाल: शराबबंदी का जिन्न बोतल से बाहर…क्या रद्द होगा Bihar Liquor Ban? पढ़िए NDA ऑन डिमांड@रिव्यू

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Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। इस जिन्न ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां एक दशक पुराने कानून पर फिर से मंथन की मांग उठ रही है।

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बिहार में बवाल: क्या रद्द होगा Bihar Liquor Ban? राजग में ही उठ रही समीक्षा की मांग

नीतीश सरकार और Bihar Liquor Ban: क्या कहते हैं सहयोगी?

बिहार में करीब एक दशक पहले लागू किए गए शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर गर्मागर्म बहस छिड़ गई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर से ही कुछ प्रभावशाली नेताओं ने इस नीति की गहन समीक्षा की मांग उठाई है, जिससे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया भूचाल आ गया है। इन मांगों ने सरकार को असमंजस में डाल दिया है, क्योंकि कानून को वापस लेना या उसमें ढील देना एक बड़ा राजनीतिक जोखिम हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, नीतीश सरकार ने इन मांगों को स्पष्ट शब्दों में खारिज करते हुए कहा है कि शराबबंदी जारी रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

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सूत्रों के मुताबिक, राजग के कुछ घटक दलों का मानना है कि शराबबंदी कानून समीक्षा एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उनका तर्क है कि इस कानून के लागू होने के बाद से राज्य में कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां पैदा हुई हैं। कुछ नेता दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि कानून के कठोर प्रावधानों के कारण अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है, जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है और आपराधिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई मौकों पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि राज्य में शराबबंदी किसी भी कीमत पर वापस नहीं ली जाएगी। उनका कहना है कि यह एक सामाजिक सुधार का मुद्दा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। सरकार का मानना है कि शराबबंदी से महिलाओं और कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। इन दावों के बीच, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विपक्ष, हालांकि, इस मामले पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश कर रहा है, और इसे एक “विफल नीति” करार दे रहा है।

विपक्ष का हमला और आगे की राह

विपक्षी दल, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद), शराबबंदी को लेकर नीतीश सरकार पर लगातार हमलावर हैं। उनका आरोप है कि यह कानून केवल नाम का है और जमीनी स्तर पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। विपक्ष का तर्क है कि अवैध शराब की बिक्री और सेवन अब भी धड़ल्ले से जारी है, बल्कि पहले से अधिक खतरनाक रूप ले चुका है, जिसमें जहरीली शराब से मौतें भी शामिल हैं। वे प्रशासन पर कानून लागू करने में विफलता का आरोप लगाते हैं और इसकी शराबबंदी कानून समीक्षा की मांग करते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि बिहार में शराबबंदी केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर उठ रही आवाज़ें और विपक्ष का तीखा हमला, दोनों ही इस बात का संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होगी। सरकार के लिए अपनी नीति पर अडिग रहना एक चुनौती साबित हो सकता है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हों। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देखना यह होगा कि क्या नीतीश कुमार अपने इस ‘ड्राइव’ पर कायम रहते हैं, या फिर राजनीतिक दबाव के आगे झुककर कोई बीच का रास्ता निकालते हैं।

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