

RSS Film: सिनेमाई पर्दे पर एक ऐसी कहानी दस्तक दे रही है, जो देश के सबसे बड़े और पुराने स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सौ साल के सफर को बेहद बेबाकी और गहराई से बयां करती है। यह फिल्म उन अनसुने पहलुओं को सामने लाने का दावा करती है, जिन्हें शायद ही कभी बड़े पैमाने पर दर्शकों के सामने रखा गया हो।
RSS Film: ‘1925’ क्या संघ के हर रहस्य से पर्दा उठा पाएगी? जानिए फिल्म का पूरा रिव्यू!
आखिर क्या है इस RSS Film की कहानी?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर उसके शताब्दी वर्ष तक की यात्रा को समेटे हुए ‘1925’ एक ऐसी फिल्म है, जो गांधी जी की हत्या में संघ की भूमिका, आजादी की लड़ाई में योगदान और संघ प्रमुखों के साथ उनके रिश्तों जैसे संवेदनशील विषयों को भी छूती है। यह फिल्म मात्र 1 घंटे 52 मिनट में इतना कुछ कह जाती है कि आप हैरान रह जाएंगे। दावा है कि इसमें संघ के 100 सालों का सच्चा इतिहास दिखाया गया है।
फिल्म का पहला भाग डॉ. केशव बालीराम हेडगेवार यानी ‘डॉक्टर जी’ द्वारा 1925 में संघ की स्थापना, उनके बचपन की चुनौतियां और आजादी की लड़ाई के दौरान संघ की भूमिका पर केंद्रित है। वहीं, दूसरा भाग ‘गुरुजी’ एम.एस. गोलवलकर के नेतृत्व में संघ के विस्तार, संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया और राजनीति से दूर रहने के फैसलों को दिखाता है। यह फिल्म आरएसएस की पूरी कहानी को एक नए नजरिए से प्रस्तुत करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी जानकारीपरक शैली है। पहले सीन से ही यह दर्शकों को बांध लेती है और कहीं भी समय बर्बाद नहीं करती। वॉयस ओवर का इस्तेमाल कर कहानी को तेजी से आगे बढ़ाया गया है, जिससे दर्शक संघ के निर्माण और देश में उसकी भूमिका की कहानियों में खो जाते हैं। कुछ ऐसी बातें सामने आती हैं, जिनके बारे में आपने शायद पहले कभी नहीं सुना होगा। फिल्म संतुलन बनाए रखती है और किसी को नकारात्मक रूप से लक्षित नहीं करती है। गांधी, नेहरू और इंदिरा गांधी को कुछ देर के लिए दिखाया जाता है, लेकिन उनके बारे में कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं है।
फिल्म के निर्माता दावा करते हैं कि इसे एआई और इंसानों के हाइब्रिड तरीके से बनाया गया है, हालांकि एआई का प्रभाव कुछ ही दृश्यों में महसूस होता है, ज्यादातर युद्ध के दृश्यों में वीएफएक्स का उपयोग किया गया है। यह सच है कि फिल्म में जानकारी थोड़ी ज्यादा है, लेकिन 100 साल के इतिहास को इतने कम समय में समेटना आसान नहीं था। कुल मिलाकर, यह एक ऐसी फिल्म है जो जानकारी देती है और कमाल के तरीके से देती है। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
डायरेक्शन, म्यूजिक और रेटिंग
‘1925’ की दमदार राइटिंग का श्रेय अनिल अग्रवाल, उत्सव डान, रोहित गहलोत और नितिन सावंत को जाता है, जबकि आशीष मॉल ने इसे खूबसूरती से निर्देशित किया है। फिल्म की रिसर्च शानदार है और यही वजह है कि यह संतुलित और प्रभावी लगती है। कृधान मीडियाटेक द्वारा निर्मित और वीर कपूर द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म हाइब्रिड सिनेमा की दिशा में एक नई पहल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सनी इंदर और शांतनू शंकर का संगीत फिल्म के साथ बखूबी तालमेल बिठाता है। शंकर महादेवन, शान और सुरेश वाडेकर जैसे दिग्गज गायकों की आवाज में गाने फिल्म के अनुभव को और भी खास बना देते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अगर आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह फिल्म निश्चित रूप से देखने लायक है।
रेटिंग: 3 स्टार्स


