

Rahul Gandhi Jiu-Jitsu: राजनीति का अखाड़ा भी कुछ कम नहीं, जहाँ दांव-पेंच ऐसे लगते हैं जो अक्सर आँखों से ओझल रहते हैं। प्रतिद्वंद्वी को घेरने और दबाव में लाने की कला, जिसे कुछ माहिर खिलाड़ी ही समझ पाते हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में संसद में अपने जिउ-जित्सु के उदाहरण की व्याख्या की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक ‘पकड़’ और ‘दबाव’ में ‘फंसे’ हुए हैं, जो आम जनता को दिखाई नहीं देते। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए समझाया कि कई लोगों ने उनसे पूछा था कि उन्होंने अपने संसदीय भाषण में जिउ-जित्सु का उदाहरण क्यों दिया।
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि ‘पकड़’ और ‘दबाव’ जिउ-जित्सु खेल के अभिन्न अंग हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। और इसी तरह प्रतिद्वंद्वी को नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में भी इसी तरह के तरीके मौजूद हैं, लेकिन ये जनता की नज़रों से छिपे रहते हैं।
Rahul Gandhi Jiu-Jitsu: जिउ-जित्सु का उदाहरण क्यों दिया राहुल गांधी ने?
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि राजनीतिक पकड़ और दबाव अक्सर छिपे रहते हैं। आम आदमी उन्हें आसानी से देख नहीं पाता है। यह समझने के लिए कि दबाव कहाँ से आ रहा है, आपको बहुत बारीकी से और ध्यान से देखना होगा। गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई अदृश्य दबावों के बीच ‘फंसे’ हुए हैं। उन्होंने अमेरिका में उठे अडानी मामला और एपस्टीन मामले का जिक्र करते हुए दावा किया कि कई भारतीय नाम उन फाइलों से जुड़े हैं जिन्हें अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
प्रधानमंत्री पर चीन और अमेरिका का ‘दबाव’?
गांधी ने कहा कि एक तरफ चीन हमारी सीमा पर लगातार सक्रिय है, और दूसरी तरफ अमेरिका अपनी भू-राजनीतिक रणनीतियों में लगा है। इन दोनों के बीच, हमारे प्रधानमंत्री एक जटिल स्थिति में ‘फंसे’ हुए हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक छवि बड़े वित्तीय समर्थन से कायम है और उस छवि पर नियंत्रण भारत के बाहर के लोगों के हाथों में है। गांधी ने दावा किया कि मौजूदा नीतिगत फैसलों का असर देश के किसानों और कपड़ा क्षेत्र पर पड़ सकता है, और आरोप लगाया कि भारत को अमेरिका से आयात बढ़ाना पड़ सकता है। उन्होंने डेटा प्रबंधन पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। गांधी ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण डेटा है। सच्चाई यह है कि हमारा डेटा नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिका की अमेरिकी कंपनियों को बहुत मामूली कीमत पर सौंपा जा रहा है। और मेरी इस बात को याद रखिएगा, हम जल्द ही एक ‘डेटा कॉलोनी’ बनने जा रहे हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गांधी ने सवाल उठाया कि भारत अमेरिका के साथ डेटा, कृषि और उद्योग से संबंधित समझौते क्यों करेगा, और कहा कि इसका जवाब प्रधानमंत्री पर लगाए गए ‘दबाव और शिकंजों’ में निहित है।


